Vivek Tiwari Murder Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करीब 8 साल पहले हुए सनसनीखेज विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत का अंतिम फैसला आ गया है. लखनऊ की जिला…

Vivek Tiwari Murder Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करीब 8 साल पहले हुए सनसनीखेज विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत का अंतिम फैसला आ गया है. लखनऊ की जिला अदालत ने मुख्य आरोपी और पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए दस साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है. वहीं मामले में सह आरोपी रहे दूसरे सिपाही संदीप कुमार को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है. इस फैसले के साथ ही राजधानी के सबसे चर्चित और विवादित मामलों में से एक का न्यायिक निस्तारण हो गया है

अदालत ने प्रशांत चौधरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग दो के तहत दोषी माना है. इस कानूनी प्रावधान के तहत ऐसा कृत्य आता है जिसमें जान लेने का सीधा इरादा न साबित हो लेकिन यह जानकारी जरूर होती है कि उस कदम से किसी की जान जा सकती है. इसी आधार पर अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों को देखने के बाद सजा की अवधि तय की. प्रशांत चौधरी पहले ही करीब 8 साल की अवधि जेल में बिता चुका है. अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी की ओर से चलाई गई गोली ने एक बेगुनाह नागरिक की जान ली थी

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के दो सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. दोनों पर घटना के समय मौके पर मौजूद रहने और कार्रवाई में शामिल होने के आरोप लगे थे. अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद संदीप कुमार की भूमिका को लेकर साक्ष्यों की जांच की. अदालत ने पाया कि गोली चलाने में संदीप कुमार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी. इसके चलते संदीप कुमार को सभी आरोपों से दोषमुक्त करार दे दिया गया. बरी होने के साथ ही संदीप के खिलाफ चल रही सभी कानूनी प्रक्रियाएं समाप्त हो गई हैं

यह खौफनाक वारदात अट्ठाईस सितंबर दो हजार अठारह की देर रात घटी थी. एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान को घर छोड़ने जा रहे थे. दोनों गोमती नगर विस्तार इलाके से अपनी गाड़ी से गुजर रहे थे. इसी दौरान इलाके में मोटरसाइकिल से गश्त कर रहे दो सिपाहियों ने उनकी गाड़ी को संदिग्ध मानकर रुकने का इशारा किया. गाड़ी न रुकने पर सिपाहियों ने उसे रोकने की कोशिश की और इसी दौरान प्रशांत चौधरी ने अपनी सर्विस पिस्टल से सीधे गाड़ी के शीशे पर गोली चला दी. गोली विवेक तिवारी के चेहरे पर लगी और गाड़ी आगे जाकर डिवाइडर से टकरा गई

गोली लगने के बाद विवेक तिवारी को गंभीर हालत में तुरंत लोहिया अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने उनको बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन अत्यधिक खून बहने और गोली के गहरे जख्म के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. इस घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया था. मृतक की सहकर्मी सना खान इस पूरे घटनाक्रम की प्रत्यक्षदर्शी थीं. उन्होंने बाद में पुलिस और मीडिया के सामने पूरी सच्चाई रखी कि किस तरह बिना किसी बड़े खतरे के सिपाही ने जानलेवा कदम उठाया

घटना के सामने आने के बाद भारी जनाक्रोश देखने को मिला था. सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े हुए जिसके बाद दोनों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर गिरफ्तार कर लिया गया था. सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी ने घटनास्थल की जांच पड़ताल की और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से पूरी घटना की कड़ियों को जोड़ा. चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में गवाहों के बयान दर्ज किए गए. करीब 8 साल तक चली इस लंबी अदालती लड़ाई के बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ मिला है