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विदेशी कंपनियों से भारतीय बाजार की कमाई पर लगेगा कड़ा टैक्स

🕐 11 Aug 2026, 12:51 pm• 2 min padho • Chugal Khor News
विदेशी कंपनियों से भारतीय बाजार की कमाई पर लगेगा कड़ा टैक्स

कम टैक्स वाले देशों में मुनाफा ट्रांसफर करने की चालाकी पर भी लगेगी लगाम

एजेंसी। न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मुख्यालय में वैश्विक कर व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए ऐतिहासिक बैठक चल रही है। 3 से 13 अगस्त तक चलने वाले इस पांचवें सत्र में दुनिया भर के देश नए ह्ययूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन आॅन इंटरनेशनल टैक्स कोआॅपरेशन को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस बैठक का मुख्य मकसद भारत जैसे विकासशील देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करने वाली वैश्विक कर व्यवस्था बनाना है

भारत को मिलेगा बड़ा अधिकार

पहली बार सभी देश केवल विचार-विमर्श के बजाय तीन प्रमुख कर समझौतों के कानूनी मसौदों पर सीधी चर्चा कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को सतत विकास के लिए वित्तपोषण कार्यालय देख रहा है। समिति का लक्ष्य 2027 तक अंतिम मसौदे को संयुक्त राष्ट्र महासभा से मंजूर कराना है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार यह सम्मेलन भारत के लिए ऐतिहासिक मौका है। आज के डिजिटल युग में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में भौतिक दफ्तर खोले बिना करोड़ों ग्राहकों से भारी मुनाफा कमा रही हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरी चड्ढा ने कहा कि अब टैक्स का आधार यह होना चाहिए कि वास्तविक आर्थिक गतिविधि और ग्राहक कहां हैं। अगर यह सम्मेलन सफल होता है तो भारत को अपने विशाल बाजार से कमाई करने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों पर सीधे टैक्स लगाने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। इससे कम टैक्स वाले देशों में मुनाफा ट्रांसफर करने की चालाकी पर भी लगाम लगेगी

कर चोरी पर कसा जाएगा शिकंजा

विशेषज्ञ योगेंद्र कपूर के मुताबिक कई ट्रांसफर प्राइसिंग, रॉयल्टी, परामर्श शुल्क और इंट्रा-ग्रुप लोन के जरिए मुनाफे को भारत जैसे उच्च टैक्स वाले देशों से निकालकर शून्य टैक्स वाले देशों में भेज देती हैं। इससे निपटने के लिए भारत और अन्य विकासशील देश देशों के बीच वित्तीय सूचनाओं के सीधे आदान- प्रदान की मांग कर रहे हैं। नई यूएन व्यवस्था में डिजिटल डेटा साझा होने से पैसों के लेन-देन का मजबूत रिकॉर्ड बनेगा। इससे कर चोरों में पकड़े जाने का डर होगा और विकसित देशों का वर्चस्व भी कम होगा

स्रोत: The Hindi Pioneer

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