Train Reservation Rule: त्योहारों का मौसम आते ही परदेस में रहने वाले हर इंसान का दिल अपने घर लौटने को मचलने लगता है. दीवाली और छठ जैसे महापर्व पर अपनों के बीच…

Train Reservation Rule: त्योहारों का मौसम आते ही परदेस में रहने वाले हर इंसान का दिल अपने घर लौटने को मचलने लगता है. दीवाली और छठ जैसे महापर्व पर अपनों के बीच पहुंचने की खुशी जितनी बड़ी होती है, ट्रेन में एक अदद कंफर्म सीट पाने की जद्दोजहद उतनी ही थका देने वाली साबित होती है. हर साल लाखों लोग टिकट खिड़की से लेकर आनलाइन पोर्टल तक महीनों पहले से नजर गड़ाए रहते हैं, लेकिन हाथ लगती है तो सिर्फ लंबी वेटिंग लिस्ट या फिर आरएसी टिकट. इसके बाद शुरू होता है चलती ट्रेन में टीटीई को ढूंढने और खाली सीट के लिए मिन्नतें करने का लंबा सिलसिला. इस बार भारतीय रेलवे ने आम यात्रियों की इसी भारी पीड़ा को समझा है और इसका एक पक्का समाधान तलाश निकाला है. अब चलती ट्रेन में खाली बर्थ पाने के लिए किसी को टीटीई के पीछे भागने की कतई जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि पूरी प्रक्रिया को मशीनी और आटोमेटिक बनाया जा रहा है

अब तक की व्यवस्था पर नजर डालें तो ट्रेन में सफर करने वाले हर व्यक्ति को कड़वे अनुभवों से गुजरना पड़ता है. जब कोई मुसाफिर अपनी आरक्षित सीट पर नहीं आता है, तो वह सीट ट्रेन में खाली पड़ी रह जाती है. टीटीई अपने पास मौजूद चार्ट या मशीन में उस सीट को खाली तो दर्ज कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद वह बर्थ किसे मिलेगी, यह पूरी तरह टीटीई की मर्जी और विवेक पर निर्भर करता है. कई बार देखने में आता है कि सीट खाली होने के बावजूद कतार में सबसे आगे खड़े जरूरतमंद यात्री को सीट नहीं मिल पाती. कभी जान-पहचान के आधार पर तो कभी अन्य कारणों से टीटीई अपनी पसंद से बर्थ किसी और को थमा देते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी रही है, जिससे नियम का पालन करने वाले ईमानदार यात्रियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ती थी

रेलवे प्रशासन ने इस मनमानी को जड़ से खत्म करने के लिए हैंडहेल्ड टर्मिनल यानी एचएचटी सिस्टम को पूरी तरह आटोमेटिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. वर्तमान में लगभग सभी महत्वपूर्ण ट्रेनों के टिकट जांच कर्मियों को यह डिजिटल डिवाइस दिया जा चुका है. नए बदलाव के तहत जैसे ही टीटीई इस डिवाइस में किसी यात्री के गैरहाजिर होने की सूचना दर्ज करेगा, सिस्टम खुद सक्रिय हो जाएगा. इस डिवाइस का सीधा जुड़ाव रेलवे के केंद्रीय सर्वर से रहेगा. सीट खाली होते ही आटोमेटिक प्रणाली अपने आप नियमों के तहत सबसे पहले आरएसी वाले मुसाफिर को पूरी बर्थ में बदलेगी और फिर वेटिंग लिस्ट के क्रम में सबसे ऊपर चल रहे यात्री को खाली सीट थमा देगी. इस पूरी प्रक्रिया में टीटीई का कोई मानवीय दखल नहीं रहेगा, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी

यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह होगी कि उन्हें अपनी सीट कंफर्म होने की जानकारी के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ेगा. जैसे ही केंद्रीय प्रणाली खाली सीट को किसी आरएसी या वेटिंग वाले मुसाफिर के नाम करेगी, तुरंत उस यात्री के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक संदेश भेज दिया जाएगा. इस संदेश में बोगी संख्या और नई बर्थ की पूरी जानकारी साफ-साफ दर्ज होगी. इससे यात्री बिना किसी उलझन के सीधे अपनी नई सीट पर जाकर आराम से बैठ सकेगा. इसके साथ ही यात्रियों को चलती ट्रेन में खाली सीटों की लाइव स्थिति देखने की सुविधा भी चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पूरा सफर पारदर्शी और तनावमुक्त बन सके

त्योहारों के दिनों में सबसे ज्यादा मारामारी उत्तर भारत और खासतौर पर बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरफ जाने वाली ट्रेनों में देखने को मिलती है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इस आधुनिक प्रणाली की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मुंबई से बिहार की ओर जाने वाली चुनिंदा ट्रेनों में कर दी है. इस रूट पर हर साल यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए नए सिस्टम के जमीनी नतीजों को परखने के लिए यह सबसे सही रास्ता चुना गया है. इस रूट पर मिले सकारात्मक अनुभवों और तकनीकी सुधारों के बाद रेलवे बोर्ड की योजना इसे देश के अन्य सभी प्रमुख रेल मार्गों पर भी तेजी से लागू करने की है

रेलवे का यह आधुनिक कदम तकनीक के सहारे आम जनता के सफर को सम्मानजनक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है. जब सफर के दौरान किसी यात्री को अपनी ही जायज सीट के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाने की नौबत न आए, तभी व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है. आटोमेटिक सीट आवंटन लागू होने से न केवल भ्रष्टाचार और पक्षपात पर लगाम लगेगी, बल्कि सफर कर रहे परिवारों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी राहत मिलेगी. इस बार दीवाली और छठ पर जब लोग अपने घर की राह पकड़ेंगे, तो उन्हें कम से कम सीट के लिए टीटीई के पीछे कतार लगाने से मुक्ति जरूर मिलेगी