S. Jaishankar in UNGA: विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका के दौरे पर हैं. सोमवार (स्थानीय समय) को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भाग लिय…
S. Jaishankar in UNGA: विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका के दौरे पर हैं. सोमवार (स्थानीय समय) को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भाग लिया. इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक मजबूत और ज्यादा असरदार मल्टीलेटरल सिस्टम (बहुपक्षीय व्यवस्था) की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि जियोपॉलिटिकल कॉम्पिटिशन, तनाव और टकराव की वजह से ग्लोबल ऑर्डर पर दबाव बढ़ रहा है
81वीं यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली के दौरान आयोजित 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज़्म समिट' में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव के दौर से गुजर रही है. ऐसे में देशों को आपसी सहयोग मजबूत करने की जरूरत है, न कि मतभेदों को और गहरा होने देने की
विदेश मंत्री जयशंकर ने आगे कहा, "हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब ग्लोबल ऑर्डर दबाव में है. कुछ दशकों से दुनिया में लगातार रीबैलेंसिंग (संतुलन में बदलाव) देखी जा रही है, जो लंबे समय से अपेक्षित स्ट्रक्चरल बदलाव था. हालांकि, बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन, जियोपॉलिटिकल तनाव और असल टकराव ने इसे पूरी तरह से अलग रूप दे दिया है."
A pleasure to join @eucopresident António Costa in co-chairing the Partners for Multilateralism, International Law, Peace & Prosperity (P4M) Summit. Took the opportunity to:✅ Stress the essentiality of multilateralism today to preserve the spirit of international cooperation… pic.twitter.com/0AWJjijNDt
विदेश मंत्री ने कहा कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के तेजी से बढ़ने के नतीजे सिर्फ अलग-अलग देशों के आपसी रिश्तों तक ही सीमित नहीं रहेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन प्रवृत्तियों को बिना रोक-टोक जारी रहने दिया गया, तो इससे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के जरिए देशों के मिलकर काम करने का बुनियादी सिद्धांत कमजोर हो सकता है. उन्होंने कहा, "अगर इसे नहीं रोका गया, तो यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर ही सवालिया निशान लगा देगा. इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि इस मोड़ पर बहुपक्षवाद मजबूती से अपनी भूमिका निभाए."
विदेश मंत्री जयशंकर ने आगे कहा कि बहुपक्षीय सहयोग का सीधा संबंध दुनिया की कुछ सबसे अहम चुनौतियों से है, जिनमें शांति और सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय, विकास के लिए फंडिंग, नई तकनीकें, आतंकवाद, सप्लाई-चेन की मजबूती और भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी शामिल हैं
जयशंकर ने कहा, "यहां बात सिर्फ शब्दों और बयानों की नहीं, बल्कि बहुत अहम और वास्तविक मुद्दों की है. शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय और जलवायु न्याय, नई तकनीकें और विकास के लिए फंडिंग, आतंकवाद का मुकाबला और सप्लाई-चेन को मजबूत करना, साथ ही आपदाओं का सामना करने की क्षमता और महामारियों की तैयारी- ये सभी सहयोग की इच्छाशक्ति पर निर्भर करते हैं."
इसके साथ ही विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सिस्टम ने मिलकर काम करके अहम फायदे हासिल किए हैं. उन्होंने कहा कि जब देश और सुधारों की दिशा में काम कर रहे हों, तो इन उपलब्धियों को कम नहीं आंका जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें यह समझना चाहिए कि हमने अब तक जो कुछ भी हासिल किया है, वह सामूहिक प्रयासों से ही हुआ है. यहां सीख यह है कि बेहतर की कोशिश करते हुए अच्छी चीजों को बचाए रखा जाए."
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