Uttarakhand Homestays: उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में होम स्टे पर्यटन के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार का भी मजबूत माध्यम बनते जा रहे हैं. राज्य में 5 हजार से ज्…

Uttarakhand Homestays: उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में होम स्टे पर्यटन के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार का भी मजबूत माध्यम बनते जा रहे हैं. राज्य में 5 हजार से ज्यादा होम स्टे संचालित हैं. वहीं, रिवर्स माइग्रेशन के तहत 6,500 से ज्यादा प्रवासी अपने गांव लौट चुके हैं. इनमें करीब 1,500 लोगों ने होम स्टे को अपनी आजीविका का जरिया बनाया है

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार का उद्देश्य पर्यटन को पहाड़ के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाना है, ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकें. सरकार का जोर गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने और पलायन को कम करने पर है

देवभूमि उत्तराखंड के गांवों में होम स्टे रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन रहे हैं।प्रदेश में 5,000 से अधिक होम स्टे का संचालन और 6,500 से अधिक प्रवासियों की गांव वापसी से पहाड़ों में पर्यटन को नई गति मिली है। हमारा संकल्प है कि पहाड़ के युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार… pic.twitter.com/XIZ4oMoNAw

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद शुरू हुए रिवर्स माइग्रेशन के प्रयासों के तहत 6,500 से ज्यादा लोग अपने मूल गांव लौटे हैं. इनमें करीब 22 प्रतिशत लोगों ने होम स्टे के जरिए रोजगार शुरू किया है

होम स्टे का फायदा केवल इसे चलाने वाले परिवार तक सीमित नहीं रहता. पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय टैक्सी सेवाओं, गाइड, ट्रेकिंग, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और पहाड़ी कृषि उत्पादों की मांग भी बढ़ सकती है. इससे गांवों में छोटे कारोबार और स्वरोजगार के दूसरे अवसर भी पैदा होते हैं

उत्तराखंड सरकार होम स्टे को बढ़ावा देने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना चला रही है. सरकार के अनुसार, योजना के तहत अब तक 537 लाभार्थियों को 79.28 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है. इस योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को अपने घरों में पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने और इसे आय का जरिया बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है. आवेदन मिलने के बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति प्रस्ताव की जांच और आवेदक का साक्षात्कार करती है. स्वीकृति के बाद ऋण के लिए प्रस्ताव बैंक को भेजा जाता है

उत्तराखंड पर्यटन विभाग की योजना संबंधी जानकारी के अनुसार, होम स्टे योजना नगर निगम क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य क्षेत्रों में लागू है. इसके लिए मकान का आवासीय होना जरूरी है. होम स्टे का मालिक या लीजधारक अपने परिवार के साथ उसी मकान में रहना चाहिए. होम स्टे में पर्यटकों के लिए कम से कम एक और अधिकतम छह कमरों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा होम स्टे का पंजीकरण कराना भी जरूरी है. संचालक को पर्यटकों के लिए भोजन की व्यवस्था भी करनी होती है

होम स्टे की खासियत यह है कि इससे पर्यटकों को सिर्फ रहने की जगह नहीं मिलती, बल्कि वे स्थानीय जीवनशैली, खान-पान और संस्कृति को भी करीब से समझ सकते हैं. वहीं, स्थानीय परिवारों को अपनी परंपराओं और स्थानीय उत्पादों को पर्यटकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है.सरकार के आधिकारिक होम स्टे प्लेटफॉर्म के जरिए पंजीकृत होम स्टे को पर्यटकों तक पहुंच बनाने और प्रचार का भी अवसर मिलता है

उत्तराखंड में होम स्टे के अलावा वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना और उत्तराखंड पर्यटन उद्यमी प्रोत्साहन योजना जैसी योजनाएं भी पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और स्थानीय निवेश को बढ़ावा देने के लिए संचालित हैं.सरकार का फोकस पर्यटन को गांवों की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर है. पहाड़ों में बढ़ते होम स्टे इसी दिशा में एक अहम माध्यम बन रहे हैं. इससे स्थानीय युवाओं को गांव में रहकर कमाई का विकल्प मिल रहा है और पर्यटकों को उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां की संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव भी मिल रहा है.मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, सरकार का संकल्प है कि पहाड़ के युवाओं को रोजगार के लिए गांव छोड़कर बाहर न जाना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलें