प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पहली बार देश की सर्वोच्च अदालत के किसी सेवारत न्यायमूर्ति ने आयोग परिसर का…

प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पहली बार देश की सर्वोच्च अदालत के किसी सेवारत न्यायमूर्ति ने आयोग परिसर का आधिकारिक दौरा किया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग परिसर में नवनिर्मित आदित्य पतंजलि योगपीठम् का उद्घाटन किया और स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि जिस तरह न्यायालय में प्रभाव या सत्ता नहीं, बल्कि साक्ष्य और तर्क बोलते हैं, उसी तरह भर्ती प्रक्रिया में पहचान या सिफारिश नहीं, बल्कि केवल योग्यता को महत्व मिलना चाहिए।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के लिए यह अवसर बेहद खास रहा आयोग के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत न्यायमूर्ति का आधिकारिक आगमन हुआ।न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने परिसर में विकसित आदित्य पतंजलि योगपीठम् का उद्घाटन किया। इसके साथ ही युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण भी किया। इस विशेष स्थल को योग, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां सूर्य नमस्कार की विभिन्न मुद्राओं के साथ भारत के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के योगदान को भी प्रदर्शित किया गया है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को प्रेरणा मिल सके।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग की कार्यप्रणाली और पारदर्शी चयन व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 तक लोक सेवा आयोगों की स्वतंत्रता और निष्पक्ष कार्यप्रणाली के लिए मजबूत प्रावधान किए गए हैं।न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि न्याय के सिंहासन पर हो या चयन की वेदी पर, किसी व्यक्ति की पहचान नहीं, बल्कि उसकी पात्रता और योग्यता को ही मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग केवल परीक्षाएं आयोजित करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि देश के भविष्य के लिए योग्य और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों का चयन करने वाली संवैधानिक संस्था है। एक अधिकारी का चयन केवल एक व्यक्ति को नौकरी देना नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों के सुशासन की नींव रखना है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि चयन प्रक्रिया का निष्पक्ष होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी निष्पक्षता जनता को दिखाई भी देनी चाहिए।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के बीच गहरे संवैधानिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और लोक सेवा आयोग के कार्यक्षेत्र भले ही अलग-अलग हों, लेकिन दोनों की मूल भावना एक ही है और वह है जनता का विश्वास। जहां न्यायपालिका नागरिकों को न्याय का भरोसा दिलाती है, वहीं लोक सेवा आयोग प्रत्येक योग्य अभ्यर्थी को समान अवसर मिलने का संवैधानिक विश्वास प्रदान करता है।अपने दौरे के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग परिसर में विकसित बोधि संगम, कल्पवृक्ष संग्रहालय और हल्दीघाटी शौर्य स्थल का भी निरीक्षण किया। बोधि संगम को अभ्यर्थियों के आत्मचिंतन और प्रेरणा के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। वहीं ऐतिहासिक कल्पवृक्ष संग्रहालय में आयोग की विरासत और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया गया है।हल्दीघाटी शौर्य स्थल पर स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं, दांडी मार्च की प्रतिकृति और राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ देश के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं। इस अवसर पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने वृंदावन ऑफिसर्स आवास के 12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण किया और आयोग के आधिकारिक कैलेंडर का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम के दौरान आयोग में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।इसके साथ ही आयोग के सदस्य मेजर जनरल डॉक्टर मनोज कुमार ने आयोग की आधुनिक कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्थाओं और पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अशोक भूषण, हाईकोर्ट के कई न्यायमूर्ति, वरिष्ठ अधिवक्ता, आयोग के सदस्य, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।