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8 उन्नाव: गांधी जयंती से पहले गुरुवार को पुरवा में बच्चों को POCSO कानून और बाल सुरक्षा से जुड़े अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) के निर्देश पर आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को यौन अपराधों से बचाव, बाल अधिकार और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में किया गया। इस दौरान बच्चों को कानून की जानकारी देने के साथ-साथ किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार की स्थिति में मदद लेने और शिकायत करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पुरवा हिमानी गौतम ने बच्चों को POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए अपने अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार के गलत स्पर्श, अनुचित व्यवहार या उत्पीड़न की स्थिति में बच्चों को चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों या किसी जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बच्चों को Good Touch और Bad Touch के बारे में भी समझाया गया। बच्चों को बताया गया कि अपने शरीर को लेकर किसी भी असहज या अनुचित व्यवहार को पहचानना जरूरी है।
उन्हें यह भी समझाया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार उन्हें असहज महसूस कराता है, तो वे भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक या जिम्मेदार व्यक्ति से इसकी जानकारी साझा कर सकते हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को संभावित यौन अपराधों के प्रति जागरूक करना और जरूरत पड़ने पर समय रहते सहायता लेने के लिए तैयार करना रहा।
कार्यक्रम में बच्चों को बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। उन्हें बताया गया कि भारत में बाल विवाह से संबंधित कानून के तहत विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है।
वहीं, POCSO कानून के संदर्भ में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। बच्चों को समझाया गया कि कम उम्र में विवाह या यौन शोषण जैसी परिस्थितियों से जुड़े मामलों में कानून की जानकारी होना बेहद महत्वपूर्ण है।
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हिमानी गौतम ने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जागरूकता के जरिए बच्चे अनुचित व्यवहार को पहचान सकते हैं और जरूरत पड़ने पर समय रहते मदद ले सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने बाल सुरक्षा, POCSO कानून और अन्य कानूनी प्रावधानों से जुड़े विषयों की जानकारी ली। बच्चों ने अपनी जिज्ञासाएं भी सामने रखीं, जिनके बारे में उन्हें आवश्यक जानकारी दी गई।
यह कार्यक्रम SALSA यानी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के जागरूकता अभियान के तहत आयोजित किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य और स्टाफ की ओर से कार्यक्रम की व्यवस्था की गई और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को इसमें शामिल कराया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को कानून की जानकारी देकर उन्हें सुरक्षित, सजग और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने पर जोर दिया गया।
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