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UGC विवाद पर RSS का बड़ा बयान, नए नियमों को बताया 'असंतुलित'; बीजेपी के सामने बढ़ी सियासी चुनौती? -

🕐 02 Nov 2026, 06:40 pm• 3 min padho • Chugal Khor News
UGC विवाद पर RSS का बड़ा बयान, नए नियमों को बताया 'असंतुलित'; बीजेपी के सामने बढ़ी सियासी चुनौती? -

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का बयान सामने आया है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने UGC के नए सर्कुलर को असंतुलित बताते हुए कहा है कि इस मामले में आगे जो भी फैसला हो, वह संतुलित होना चाहिए। संघ के इस बयान के बाद UGC विवाद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुनील आंबेकर ने UGC के नए नियमों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संघ पहले ही इस सर्कुलर को असंतुलित बता चुका है। सरकार और UGC ने भी इस चिंता पर ध्यान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर रोक लगाई है और मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। आंबेकर के मुताबिक, आगे जो भी निर्णय लिया जाए, उसमें संतुलन का ध्यान रखा जाना चाहिए। सरकार को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतिम फैसला सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखकर हो।

UGC ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए इक्विटी रेगुलेशन जारी किए थे। इन नियमों में संस्थानों के भीतर समता समितियों के गठन का प्रावधान किया गया था। हालांकि, नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों को लेकर सवाल उठे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया और फिलहाल 2012 के नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया। अदालत ने नियमों की भाषा और उनके संभावित प्रभाव को लेकर कई सवाल उठाए थे। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इन नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

UGC विवाद पर बीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं ने भी नए नियमों को लेकर आपत्तियां जताई हैं। पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सार्वजनिक रूप से इन नियमों का विरोध किया था और कहा था कि ऐसे कानून नहीं होने चाहिए जो समाज में विभाजन बढ़ाएं। वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने भी नियमों में सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखने और झूठी शिकायतों पर कार्रवाई के प्रावधान की जरूरत बताई थी।

नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के कई संगठनों ने चिंता जताई थी। उनका तर्क है कि नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को जातिगत भेदभाव से संरक्षण देने और गलत शिकायतों के खिलाफ कार्रवाई के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। दूसरी ओर, इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए शिकायत निवारण की व्यवस्था मजबूत करना बताया गया था। यही वजह है कि UGC के नए नियमों को लेकर अलग-अलग सामाजिक और छात्र संगठनों के बीच बहस जारी है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले UGC विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों की नाराजगी और बीजेपी से जुड़े नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बीच पार्टी के सामने सभी पक्षों की चिंताओं को संबोधित करने की चुनौती है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस मुद्दे का चुनावी नतीजों पर कितना प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल UGC नियमों का भविष्य सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और केंद्र सरकार के पुनर्विचार से जुड़ा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और UGC की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर रहेगी।

स्रोत: Filmitics

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