Chief Minister Breakfast Scheme: तमिलनाडु की सत्ता में बदलाव के बाद यह माना जा रहा था कि पिछली सरकार की लोकलुभावन योजनाओं पर कैंची चल सकती है, लेकिन मुख्यमंत्र…

Chief Minister Breakfast Scheme: तमिलनाडु की सत्ता में बदलाव के बाद यह माना जा रहा था कि पिछली सरकार की लोकलुभावन योजनाओं पर कैंची चल सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने एक अलग ही सियासी लकीर खींच दी है. उन्होंने पिछली सरकार के कामकाज को पूरी तरह दरकिनार करने के बजाय उसमें बड़ा बदलाव करते हुए आगे बढ़ाने का मन बनाया है. इसी कड़ी में उन्होंने एमके स्टालिन सरकार की सबसे चर्चित योजना मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम को जारी रखने का बड़ा ऐलान किया है. इस फैसले के जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया है कि बच्चों की भलाई से जुड़ी योजनाओं में राजनीति आड़े नहीं आएगी. हालांकि, उन्होंने इस योजना को हूबहू उसी रूप में नहीं अपनाया, बल्कि इसका नाम बदलकर इसे एक नई पहचान दे दी है

विजय सरकार ने इस बहुचर्चित योजना का नाम बदलकर पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम कर दिया है. कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज को तमिलनाडु में शिक्षा और बच्चों के पोषण की नींव रखने वाला नेता माना जाता है. उन्होंने अपने दौर में स्कूल मील कार्यक्रम शुरू करके गरीब बच्चों को पढ़ाई की तरफ खींचा था. ऐसे में विजय का यह कदम कामराज की विरासत को सम्मान देने के साथ ही एक गहरा सियासी दांव भी माना जा रहा है. विजय ने यह जताने की कोशिश की है कि बच्चों को खाना खिलाने का विचार किसी एक दल का नहीं, बल्कि राज्य के महान नेताओं की देन है

योजना को नई रफ्तार देने के साथ ही मुख्यमंत्री जोसेफ विजय खुद स्कूली बच्चों के बीच पहुंचे. उनकी सादगी भरी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वे स्कूली बच्चों से बातचीत करते, उन्हें दुलारते और अपने हाथों से नाश्ता कराते नजर आ रहे हैं. इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने बिना किसी औपचारिकता के बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर नाश्ता भी किया. इस व्यवहार ने आम लोगों और अभिभावकों के दिलों को छू लिया है. जमीन पर बैठकर भोजन करने की उनकी इस सादगी की चर्चा अब पूरे राज्य में हो रही है

VIDEO | Chennai: Tamil Nadu Chief Minister C Joseph Vijay launches expansion of breakfast scheme for school students. CM Vijay serves students food in a school, interacts with them.#ChennaiNews #CMVijay(Full video available on PTI Videos - pic.twitter.com/M18mvGUta9

यह योजना केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि नई सरकार ने इसका दायरा काफी बढ़ा दिया है. स्टालिन सरकार ने साल 2022 में जब इस योजना की शुरुआत की थी, तब इसे प्राथमिक स्तर के छात्रों तक रखा गया था और बाद में सहायता प्राप्त स्कूलों तक ले जाया गया था. अब विजय की सरकार ने इसमें पंद्रह हजार से ज्यादा सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के करीब पंद्रह लाख और छात्रों को जोड़ दिया है. अब आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सुबह का गर्म और पौष्टिक नाश्ता मिल सकेगा. इसके लिए सरकार ने दो सौ सत्रह करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि मंजूर की है, जिससे इस पूरे कार्यक्रम पर कुल खर्च सात सौ चौबीस करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा

योजना का नाम बदलते ही राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है. पिछली सरकार चला रही डीएमके ने विजय के इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है. डीएमके के नेताओं का कहना है कि नई सरकार खुद की कोई नई सोच लेकर नहीं आ रही है, बल्कि उनकी सफल योजनाओं पर अपने पसंदीदा नाम की मुहर लगा रही है. डीएमके प्रवक्ता टीकेएस इलांगोवन ने तंज कसते हुए कहा कि नई सरकार का काम सिर्फ उनके शुरू किए गए कामों का नाम बदलना रह गया है, वे अपने दम पर कुछ नया नहीं कर पा रहे हैं

डीएमके के आरोपों पर विजय की पार्टी टीवीके ने भी तुरंत पलटवार किया है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमेरिका नारायणन ने साफ कहा कि राज्य में बच्चों को दोपहर का खाना देने की शुरुआत सबसे पहले कामराज ने ही की थी. इसलिए इस योजना का नाम कामराज के नाम पर रखना पूरी तरह से सही और न्यायसंगत फैसला है. कुल मिलाकर, विजय ने पिछली सरकार के अच्छे काम को रोककर जनता की नाराजगी मोल लेने के बजाय, उसका नाम बदलकर और दायरा बढ़ाकर एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं