कुंडली में सूर्य और राहु की युति को ग्रहण योग के रूप में जाना जाता है. जब यह योग किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के लग्न भाव में बनता है तो इसका प्रभाव सीधे उसके व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और सामाजिक छवि पर पड़ता है. यह योग एक ओर जहां जीवन में चुनौतियां लेकर आता है. वहीं दूसरी ओर कुछ विशेष परिस्थितियों में व्यक्ति को असाधारण सफलता भी दिला सकता है.
12 अगस्त का साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने वाला है. अक्सर आपने देखा होगा कि सूर्य ग्रहण के बारे में सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं.
फिर चाहे वो खगोलीय घटना की बात हो या फिर कुंडली में सूर्य ग्रहण की. लोग तरह-तरह के भ्रम और भय को मन में पाल लेते हैं.
लेकिन जब तक आपको यही मालूम न हो कि आपकी कुंडली में ग्रहण योग बनकर बैठा है या दुर्योग, तब तक किसी निर्णय पर न पहुंचें. अलग-अलग राशियों और अलग-अलग भाव में बनने वाले ग्रहण का फलादेश भी अलग-अलग यानी अच्छा और बुरा दोनों हो सकता है.
और पढ़ेंक्या होता है ग्रहण योग?कुंडली में सूर्य और राहु की युति को ग्रहण योग के रूप में जाना जाता है. जब यह योग किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के लग्न भाव में बनता है तो इसका प्रभाव सीधे उसके व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और सामाजिक छवि पर पड़ता है.
यह योग एक ओर जहां जीवन में चुनौतियां लेकर आता है. वहीं दूसरी ओर कुछ विशेष परिस्थितियों में व्यक्ति को असाधारण सफलता भी दिला सकता है.सूर्य आत्मा, आत्मबल और प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करता है.
जबकि राहु छाया ग्रह होकर भ्रम, महत्वाकांक्षा और असामान्य सोच का कारक माना जाता है. ऐसे में जब दोनों ग्रह एकसाथ लग्न में आते हैं तो यह स्थिति व्यक्ति के भीतर द्वंद पैदा कर देती है.





