Pitru Dosh 2026 Upay: पितृपक्ष 2026 का प्रारंभ 26 सितंबर 2026 शनिवार को हो रहा है. पितृपक्ष का अर्थ है वह पखवाड़ा जब हम शांत मन से अपने पितरों की आराधना और पूज…

Pitru Dosh 2026 Upay: पितृपक्ष 2026 का प्रारंभ 26 सितंबर 2026 शनिवार को हो रहा है. पितृपक्ष का अर्थ है वह पखवाड़ा जब हम शांत मन से अपने पितरों की आराधना और पूजा कर सके. पितृपक्ष का समय हिंदू धर्म में प्रमुख माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज धरती पर वास करने आते हैं. जब हम उन्हें मोक्ष प्रदान करने के लिए श्राद्ध व तर्पण देते हैं तो वह लोग भी प्रसन्न होकर हमें आशीर्वाद देते हैं. इसके बाद पूर्वज सीधे विष्णु धाम चले जाते हैं. पितृपक्ष के समय कई बार हमारे पूर्वज या दिवंगत मात-पिता सपने में आते हैं. इसे कई बार शुभ तो कई बार अशुभ संकेत माना जाता है. आइए जानते हैं इन संकेतों के बारे में और उपाय भी

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि पितृपक्ष के दौरान यदि माता-पिता या पूर्वज सपने में आ रहे हैं तो निश्चित ही वे कुछ कहना चाह रहे हैं. अगर पूर्वज दुखी दिखाई दे रहे हैं तो यानी कि वे आपसे नाराज है. दरअसल, पितृपक्ष में जब वे धरती पर वास करने आते हैं तो अपने परिवारजनों से मिलने आते हैं और उनसे तर्पण की इच्छा रखते हैं. इसलिए, पितृपक्ष में तर्पण करने के साथ-साथ अतिथि सत्कार करना, कौवे, गाय और कुत्ते को रोटी खिलानी चाहिए. ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है. पितृ भी प्रसन्न होते हैं

यदि आपके घर में कोई गर्भवती महिला है और उसे पितृपक्ष में किसी पूर्वज का सपना बार-बार आ रहा है तो इसका मतलब माना जाता है कि उस महिला की कोख से जो बच्चा जन्म लेने वाला है, उसके अंदर उस पूर्वज का थोड़ा सा अंश या गुण भी सम्मिलित होगा. अगर सपने में इन्हें दिवंगत माता-पिता दिख रहे हैं तो वह और भी ज्यादा शुभ माना जाता है. इसका मतलब है कि आप जो काम कर रहे हैं, उन्हें उसमें तरक्की मिलेगी और आपका सम्मान बढ़ेगा

पितृपक्ष के दौरान दिवंगत माता-पिता या पूर्वज आपके सपने में आए हैं और आपके सिर पर हाथ फेर रहे हैं तो यह भी शुभ संकेत माना जाता है. इसलिए, इसका मतलब है कि आपके पितर आपसे काफी प्रसन्न है और आप पर उनका पूरा आशीर्वाद है

माना जाता है कि पितृपक्ष में अगर आपके सपने में आपके पूर्वज दुखी, बीमार और भूखे-प्यासे दिख रहे हैं तो यानी वे बिल्कुल भी तृप्त नहीं है. उन्हें शांति नहीं मिली है और उनकी मुक्ति का मार्ग रुका हुआ है. इसलिए, वे आपसे तर्पण व श्राद्ध की कामना कर रहे हैं

ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृ दोष से जुड़े कुछ संकेत इस प्रकार बताए जाते हैं-

पितृपक्ष में रोजाना सुबह दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें. जल में काले तिल, जौ और कुशा मिलाकर तर्पण करें

भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे, कुत्ते और चींटी के लिए भी निकालें. पितृपक्ष के दौरान इसे पंचभोग कहा जाता है और कहते हैं कि ये पूर्वजों के संदेशवाहक है

किसी जरूरतमंद को या गरीब व्यक्तियों को भोजन करवाएं. इस दौरान आप इन्हें वस्त्र, अन्न तथा अन्य चीजों का भी दान कर सकते हैं. इनका दान पूर्वजों के नाम पर किया जाता है

पितृपक्ष में संध्या के समय घर के दक्षिण कोने में और तुलसी पौधे के पास सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए

पितृपक्ष में पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर उनका श्राद्ध कर्म और सामर्थ्य के अनुसार पिंडदान करना चाहिए

पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए शिव जी की पूजा करनी चाहिए. आप उनके समक्ष महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)