Punjab News: पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आए दिन कई तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन संगरूर जिले के सुनाम हलके से जुड़े नमोल गांव का यह मामला अब बेहद…
Punjab News: पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आए दिन कई तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन संगरूर जिले के सुनाम हलके से जुड़े नमोल गांव का यह मामला अब बेहद उलझ गया है. सोशल मीडिया पर गांव के भीतर नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज बुलंद करने का दावा करने वाले जग्गा सिंह ने प्रशासनिक दफ्तर के बाहर जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान देने का प्रयास किया. इसके बाद उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है
इस पूरे घटनाक्रम के तुरंत बाद जग्गा की पत्नी के बयानों के आधार पर स्थानीय पुलिस ने गांव के मौजूदा सरपंच और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया. हालांकि, जैसे ही यह मामला गरमाया, वैसे ही जिला पुलिस प्रमुख ने सामने आकर इस पूरे विवाद के पीछे की दूसरी और बेहद चौंकाने वाली कहानी बयां कर दी
संगरूर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रवजोत कौर ग्रेवाल ने इस पूरे मामले को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस की और स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया. उन्होंने बताया कि बीते दिन डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर परिसर में जग्गा सिंह नाम के व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ निगल लिया, जिसके बाद उसे तुरंत मेडिकल सहायता दी गई. एसएसपी ने साफ किया कि जग्गा सिंह कोई आम ग्रामीण नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ पहले से 9 अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं
#WATCH | Punjab: SSP Sangrur Ravjot Kaur Grewal says, "Yesterday, one Jagga Singh consumed a substance at the DC office. There are 9 FIRs against Jagga Singh; he is convicted in 4 of them. These include cases of Excise and NDPS. He is undertrial in 4 other cases. There is a rape… pic.twitter.com/XtboSW2HLs
इन 9 मामलों में से 4मुकदमों में अदालत उसे पहले ही दोषी करार दे चुकी है. इन सजायाफ्ता मामलों में आबकारी अधिनियम और एनडीपीएस से जुड़े गंभीर अपराध शामिल हैं. इसके अलावा चार अन्य मामलों में उसके खिलाफ अभी भी अदालत में सुनवाई चल रही है, जिसमें दुष्कर्म जैसा संगीन अपराध भी शामिल है
पुलिस के अनुसार, 12 सितंबर को सोशल मीडिया पर जग्गा सिंह का एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ था. इस वीडियो में उसने प्रशासन और पुलिस को खुली चु9ती देते हुए कहा था कि अगर उसकी बातों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह खुदकुशी कर लेगा. इस तरह की सार्वजनिक धमकी सामने आने के तुरंत बाद 12 सितंबर को ही पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी थी. जांच अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में कई परतें हैं. गांव की पंचायत और स्थानीय लोगों का साफ तौर पर यह कहना है कि जग्गा सिंह किसी के इशारे पर काम कर रहा है और उसे राजनीतिक लाभ लेने के लिए कुछ लोगों द्वारा भड़काया जा रहा है
अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे जग्गा सिंह की अपनी अलग ही दलील है. उसका कहना है कि उसने अपने गांव नमोल में धड़ल्ले से बिक रहे नशे के खिलाफ मोर्चा खोला था. उसने यह बात खुद मानी कि पुराने समय में वह भी बुरी लत का शिकार रह चुका है, लेकिन अब वह गांव को इस दलदल से निकालना चाहता था. जग्गा का गंभीर आरोप है कि जैसे ही उसने नशे के खिलाफ वीडियो जारी किया, गांव के सरपंच और उसके साथियों ने उसे निशाना बनाना शुरू कर दिया
पीड़ित का दावा है कि उसके घर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की गई, परिजनों से मारपीट हुई और उसे जान से मारने की धमकियां दी गईं. यही नहीं, अपने इस कृत्य के सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने घर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए और वहां लगा डीवीआर सिस्टम भी अपने साथ उखाड़ ले गए
दूसरी तरफ, गांव नमोल के आम लोगों की राय जग्गा सिंह के बयानों से बिल्कुल उलट है. गांव के लोगों ने जग्गा द्वारा सरपंच पर लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. ग्रामीणों का दो टूक कहना है कि जग्गा सिंह खुद नशे के धंधे में लंबे समय से लिप्त रहा है और जब गांव की पंचायत और सरपंच ने इलाके में नशा रोकने के लिए कड़े कदम उठाए, तो उसने बचने के लिए यह सारा नाटक रचा
ग्रामीणों का तर्क है कि गांव को नशा मुक्त करने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे सरपंच पर झूठा मुकदमा दर्ज कराना बिल्कुल गलत है. फिलहाल पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के दावों और सभी कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि सच सामने आ सके




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