Explainer: दुनिया भर में पर्यावरण असंतुलन के चलते प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला जारी है. पिछले महीने नेपाल में आई अचानक बाढ़ की इसी पर्यावरण असंतुलन का नजीता था.…
Explainer: दुनिया भर में पर्यावरण असंतुलन के चलते प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला जारी है. पिछले महीने नेपाल में आई अचानक बाढ़ की इसी पर्यावरण असंतुलन का नजीता था. इसके साथ ही समुद्र का जलस्तर भी इंसानों के लिए खतरा पैदा हो गया है. दरअसल, दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए, समुद्र का बढ़ता जलस्तर खतरा पैदा कर रहे है. इसने पहले भी अर्थव्यवस्थाओं, आजीविका और संस्कृतियों को बदला है
बता दें कि दुनिया के महासागरों का जलस्तर कम से कम पिछले तीन हजार सालों की तुलना में अभी तेजी से बढ़ रहा है, और कम से कम 1970 के बाद से समुद्र का जलस्तर बढ़ने का "मुख्य कारण" इंसानी गतिविधियां रही हैं. इस हफ्ते न्यूयॉर्क में UN की आम सभा में, दुनिया भर के नेता समुद्र का जलस्तर बढ़ने से पैदा होने वाले "अस्तित्व के लिए खतरों" पर एक उच्च-स्तरीय घोषणा को मंजूरी देने वाले हैं
इस घोषणा में कहा गया है: "समुद्र का जलस्तर बढ़ना कोई दूर की बात नहीं है, बल्कि कई लोगों के लिए यह एक वास्तविक और रोजमर्रा का अनुभव है." औसतन, 1901 और 2018 के बीच वैश्विक समुद्र के जलस्तर में 20 सेंटीमीटर (cm) की वृद्धि हुई
ऐसा ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों के पिघलने, गर्म होने पर समुद्री पानी के फैलने और जमीन पर पानी के जमाव में बदलाव के कारण हुआ है. हाल के वर्षों में इस वृद्धि की रफ्तार तेज हुई है; 1993 के बाद से समुद्र के जलस्तर में 10.6 cm की बढ़ोतरी हुई है. भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों, जमीन के नीचे से पानी निकालने और बर्फ पिघलने से धरती की सतह में होने वाले बदलावों के कारण अलग-अलग जगहों पर समुद्र का जलस्तर अलग-अलग तरह से बढ़ सकता है
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर उत्सर्जन का स्तर मध्यम रहता है, तो 1995-2014 के आधार-स्तर की तुलना में 2100 तक दुनिया भर में समुद्र का औसत जलस्तर 56 सेंटीमीटर और बढ़ जाएगा. यहा, 'कार्बन ब्रीफ' उन मुख्य तरीकों के बारे में बता रहा है जिनसे समुद्र का बढ़ता जलस्तर समाज और इकोसिस्टम, दोनों के लिए खतरा पैदा करता है
पिछले महीने UN महासचिव की जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र का जलस्तर बढ़ने से होने वाले बुरे असर का "गंभीर खतरा" दुनिया की 10 फीसदी आबादी यानी लगभग 77 करोड़ लोगों पर है. बता दें कि इस रिपोर्ट में उन जगहों को गंभीर खतरे वाली जगहों के तौर पर बताया गया है जो हाई-टाइड लाइन से पांच मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं
खतरे में रहने वाले लोगों में दुनिया के कई बड़े शहरों के लोग शामिल हैं.जिनमें भारत के मुंबई और कोलकाता और चीन के शेनझेन और ग्वांगझू शहरों का नाम भी शामिल है. इसमें कई द्वीपीय देशों की पूरी आबादी भी शामिल है
वैश्विक औसत समुद्र जलस्तर में बढ़ोतरी का मतलब ये होता है कि एक बेसलाइन के मुकाबले समुद्र की सतह औसतन कितनी ऊपर उठी है, रिलेटिव या लोकल समुद्र जलस्तर में बढ़ोतरी का मतलब है कि किसी खास जगह पर समुद्र का जलस्तर कितना बढ़ा है. यह ग्लोबल औसत से अलग हो सकता है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे जमीन की हलचल और समुद्र में पानी का बहाव, साथ ही बर्फ की चादरों के पिघलने से पृथ्वी की सतह, घूमने की गति और गुरुत्वाकर्षण खिंचाव में बदलाव
समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए कई खतरे पैदा हो जाते हैं: इससे लगातार बाढ़ और पानी भरने की समस्या बढ़ सकती है, खतरनाक तूफानी लहरें और तेज हो सकती हैं, और समुद्र तट व चट्टानें कट-फट सकती हैं. समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटीय जमीन के नीचे का जलस्तर भी ऊपर आ जाता है, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ जाता है
1900 के बाद से 100 साल में एक बार होने वाली "अत्यधिक समुद्र जलस्तर की घटनाओं" की संख्या 12 गुना बढ़ गई है. ये ऐसी घटनाएं हैं जिनमें ऊंची लहरें, तूफानी लहरें और रिलेटिव समुद्र जलस्तर में बढ़ोतरी मिलकर समुद्र के जलस्तर को बहुत ज्यादा बढ़ा देती हैं. अगर उत्सर्जन का स्तर मध्यम रहता है, तो सदी के आखिर तक कई जगहों पर ऐसी घटनाएं कम से कम हर साल और शायद उससे भी ज्यादा बार हो सकती हैं
इसके साथ ही घरों और दूसरी इमारतों को नुकसान पहुंचने के अलावा, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पानी की व्यवस्था और गंदे पानी के प्रबंधन के प्रोजेक्ट पर भी समुद्र का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है. बाढ़ की वजह से लोगों का संपर्क अस्पताल और बाजार जैसी जरूरी सुविधाओं से टूट सकता है, और कम आय वाले या हाशिए पर रहने वाले समूहों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है. समुद्र के पानी के जमीन की तरफ बढ़ने से खारा पानी अंदर तक आ जाता है, जिससे निचले तटीय इलाकों में खेती को खतरा पैदा होता है
जमीन की ऊपर-नीचे हलचल भी समुद्र का जलस्तर बढ़ने के जोखिम को बढ़ा सकती है. इसमें भूकंप या ज्वालामुखी जैसी गतिविधियों या जमीन के धंसने के कारण जमीन की स्थिति में बदलाव शामिल है. इस तरह की ऊर्ध्वाधर हलचल से स्थानीय समुद्र के जलस्तर में होने वाले बदलाव, जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ने से होने वाले असर के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकते हैं
बता दें कि समुद्र के जलस्तर में सबसे ज्यादा बदलाव का सामना कर रहे कई तटीय शहर पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में हैं. इसका एक खास उदाहरण इंडोनेशिया का जकार्ता शहर है, जो पिछले दशक में हर साल 15 सेंटीमीटर तक नीचे धंस रहा है. इसकी मुख्य वजह जमीन के नीचे के पानी (ग्राउंडवाटर) का बहुत ज्यादा दोहन है, जिससे जमीन के नीचे मौजूद पानी के भंडार ढह जाते हैं
लेकिन समुद्र का जलस्तर बढ़ने से जुड़े खतरों के बावजूद, तटीय इलाकों में आबादी बढ़ने की रफ्तार जमीन के अंदरूनी इलाकों की तुलना में ज्यादा बनी हुई है. साल 2000 और 2018 के बीच, दुनिया की आबादी में 23 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा बढ़ोतरी हुई. इसी दौरान, समुद्र तट से 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली आबादी में 28 प्रतिशत वृद्धि हुई
तटीय इलाकों में हो रहे इस विकास का मतलब है कि अगर भविष्य में समुद्र का जलस्तर न भी बढ़े, तो भी दुनिया के 136 सबसे बड़े तटीय शहरों में बाढ़ से होने वाला वैश्विक नुकसान 2050 तक हर साल 52 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है जो 2005 में 6 अरब डॉलर था. समुद्र का जलस्तर बढ़ने से पैदा हो रहे बढ़ते खतरों को देखते हुए, दुनिया भर के समुदायों ने कई तरह के अनुकूलन उपाय अपनाए हैं






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