बिहार में जमुई की 19 सितंबर की घटना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है, विपक्षी दलों ने एनडीए सरकार पर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं, इ…
बिहार में जमुई की 19 सितंबर की घटना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है, विपक्षी दलों ने एनडीए सरकार पर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं, इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कुछ महीने पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है, जिसे लेकर कांग्रेस और आरजेडी की ओर से उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है।
दरअसल, कुछ महीने पहले एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बयान दिया था, उन्होंने कहा था कि अगर रात 12 बजे खाना खाने के बाद कोई व्यक्ति घूमने जाए और किसी महिला या लड़की को कोई छू दे, तो वह अगली सुबह इस्तीफा दे देंगे, जमुई की घटना के बाद विपक्ष अब इसी बयान का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से सवाल कर रहा है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद महिलाओं या लड़कियों की सुरक्षा को लेकर इस्तीफा देने की बात कही थी, ऐसे में जमुई की घटना के बाद उन्हें अपने पुराने बयान पर कायम रहना चाहिए, रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि मंच से बड़े-बड़े दावे करना आसान है, लेकिन जमीन पर सुरक्षा सुनिश्चित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने बिहार में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
जमुई की घटना को लेकर विपक्ष लगातार बिहार सरकार को घेर रहा है, कांग्रेस और आरजेडी नेताओं का कहना है कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए, विपक्ष अब सम्राट चौधरी के पुराने बयान को आधार बनाकर उनसे पूछ रहा है कि जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने की बात कही थी, तो अब उस बयान पर उनका क्या रुख है।
जमुई की घटना और सम्राट चौधरी के पुराने बयान को लेकर बिहार की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है, विपक्ष लगातार इस्तीफे की मांग कर रहा है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस पूरे विवाद और विपक्ष के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।






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