CWC Meeting Explainer: कांग्रेस की सबसे बड़ी नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में चल रेह विशेष गहन पुन…
CWC Meeting Explainer: कांग्रेस की सबसे बड़ी नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में चल रेह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली का मुद्दा छाया रहा. बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. कांग्रेस शासित राज्यों के सीएम को भी बैठक में बुलाया गया
दरअसल यह बैठक ऐसे समय हुई जब SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ा हुआ है. कांग्रेस ने जहां प्रक्रिया में पारदर्शिता और मदताताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाएं हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े आदेश संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं
सबसे पहले तो यह जान लेते हैं कि आखिर SIR है क्या और विवाद किस बात पर हो रहा है. Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है. इसका मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है. इस प्रक्रिया में नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में बदलाव जैसे काम शामिल होते हैं
मौजूदा विवाद खास तौर पर इस बात को लेकर है कि SIR के दौरान मतदाताओं से किस तरह के दस्तावेज और घोषणाएं मांगी जा रही हैं. इसके अलावा मदताता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है
चुनाव आयोग के आधिकारिक मदताता पोर्टल पर SIR-2026 के तहत मदताता अपना नाम खोजने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और नए मतदाताओं के लिए Form-6 भरने की सुविधा उपलब्ध है
CWC बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने SIR और मतदाता सूचियों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे नागरिकों के मदतान के अधिकार पर असर पड़ सकता है
यही नहीं खरगे ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर भी तीखा हमला बोला और उन्हें पद से हटाने की मांग भी की. यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है; इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता
चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि संबंधित आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से जारी किए गए थे. आयोग ने Form-6 को लेकर भी स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म को बलदा नहीं गया, बल्कि SIR के तहत अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा प्रावधान जोड़ा गया है
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर Form-6 अभी भी नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपलब्ध है. यानी विवाद Form-6 के इस्तेमाल को खत्म करने का नहीं, बल्कि SIR के दौरान उससे जुड़े अतिरिक्त प्रावधानों और प्रक्रिया को लेकर है
विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ा है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज कराईं
इसी मुद्दे को कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में प्रमुखता से उठाया है. हालांकि, किसी आंतरिक असहमति को अपने आप में चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. यह भी चुनाव आयोग के फैसलों और आगे उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगा कि इन आपत्तियों का वास्तविक प्रशासनिक और कानूनी प्रभाव क्या है
CWC में खरगे ने राहुल गांधी द्वारा पहले उठाए गए मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया. उन्होंने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र से जुड़े मामलों में डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों और अन्य विसंगतियों के आरोपों का हवाला दिया
कांग्रेस इन उदाहरणों को मतदाता सूची की जांच और पारदर्शिता की जरूरत से जोड़ रही है. दूसरी ओर, ऐसे मामलों में किसी अनियमितता की पुष्टि संबंधित निर्वाचन रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही मानी जा सकती है
CWC बैठक में कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं
पहली मांग- पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए. कांग्रेस चाहती है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक हो
दूसरी मांग- नाम हटाने से पहले सूचना और अपील का अधिकार मिले. पार्टी का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, उन्हें इसकी जानकारी देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाना चाहिए
तीसरी मांग- राजनीतिक दलों को डेटा सरल प्रारूप में मिले. कांग्रेस चाहती है कि मतदाता सूची से जुड़ा आवश्यक डेटा समय पर उपलब्ध कराया जाए
चौथी मांग - गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र जांच हो. जहां मतदाता सूची में बड़ी अनियमितता के प्रमाण मिलें, वहां समयबद्ध जांच की मांग की गई है
पांचवीं मांग - पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता हो. कांग्रेस का कहना है कि चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और डेटा तक पर्याप्त सार्वजनिक पहुंच होनी चाहिए
SIR विवाद अब केवल मतदाता सूची के तकनीकी पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है. यह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता अधिकार, डेटा पारदर्शिता और राजनीतिक दलों के बीच भरोसे से जुड़ा व्यापक मुद्दा बन चुका है
कांग्रेस की CWC बैठक के बाद पार्टी इस मुद्दे को आगे किस स्तर तक ले जाती है, यह देखने वाली बात होगी. विपक्षी दलों की भी 30 सितंबर को इस विषय पर बैठक होने की संभावना जताई गई है
फिलहाल दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है. कांग्रेस ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को कानूनी और संस्थागत मंजूरी के तहत बताया है. अंतिम तस्वीर इस विवाद से जुड़े दस्तावेजों, आधिकारिक जवाबों और जरूरत पड़ने पर न्यायिक समीक्षा के बाद अधिक स्पष्ट होगी






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