अयोध्या: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद पर पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को…

अयोध्या: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद पर पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नियुक्त किया है। जितेंद्र मिश्रा ने अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे ने सवाल खड़े किए हैं। एक इंटरव्यू में राजेश पांडे ने दावा किया कि राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए देशभर से प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया के बाद 16 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। उनके मुताबिक, इन उम्मीदवारों में उनका नाम भी शामिल था, लेकिन पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा इंटरव्यू में शामिल नहीं हुए थे। इसके बावजूद उनकी नियुक्ति होने पर पांडे ने सवाल उठाया कि आखिर यह नियुक्ति कैसे हुई, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

‘मेरा CEO बनना तय था, फिर क्या हुआ मुझे नहीं पता’

पूर्व IPS राजेश पांडे ने कहा कि 16 चयनित आवेदकों के इंटरव्यू के दौरान उनका CEO बनना तय माना जा रहा था। उन्होंने कहा, “मेरा CEO बनना तय था, लेकिन फिर क्या हुआ मुझे नहीं पता, ये तो ट्रस्ट वाले ही बता सकते हैं।” दरअसल, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के CEO के चयन के लिए व्यापक और तकनीक आधारित प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसमें देशभर से प्राप्त करीब 5,585 आवेदनों की समीक्षा के बाद 16 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किए जाने की बात सामने आई थी। इनमें पूर्व IPS राजेश पांडे और पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर मिश्रा का नाम भी शामिल था।

सूत्रों के अनुसार, उस समय राजेश पांडे को CEO पद के संभावित दावेदारों में प्रमुख माना जा रहा था। ऐसे में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ने कई लोगों को चौंका दिया।

नियुक्ति को लेकर ट्रस्ट पर भी उठे सवाल

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर निर्माण के दौरान सेवा दे चुके हैं। बताया जाता है कि उन्होंने छुट्टी लेकर मंदिर निर्माण कार्य में अपनी सेवाएं दी थीं। अब CEO नियुक्त किए जाने के बाद उनके लिए आवासीय व्यवस्था की जा रही है, जिसके बाद वह अयोध्या में रहकर अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। हालांकि, नियुक्ति के बाद पूर्व IPS राजेश पांडे के बयान ने CEO चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने चयन प्रक्रिया और अंतिम नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की बात कही है।