Pitru Paksha 2026: इस समय पितृपक्ष चल रहा है. पितरों को समर्पित पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को होगा. इन 16 दिनों की अवधि में परिवार के दिवंगत सदस्यों का…

Pitru Paksha 2026: इस समय पितृपक्ष चल रहा है. पितरों को समर्पित पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को होगा. इन 16 दिनों की अवधि में परिवार के दिवंगत सदस्यों का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है. इसके साथ-साथ पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ कवच और स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पितर पृथ्वीलोक के नजदीक होते हैं. इस दौरान श्राद्ध और उन्हें प्रसन्न करने के उपाय करने से भी लाभ प्राप्त होता है. आइए जानते हैं पितृपक्ष में पितृ स्तोत्र और पितृ कवच पढ़ें

रुचिरुवाच

अर्चितानाममूर्तानां पितॄणां दीप्ततेजसाम्

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा

सप्तर्षोणां तथान्येषां तान्नमस्यामि कामदान्

मन्वादीनां च नेतारः सूर्याचन्द्रमसोस्तथा

तान्नमस्याम्यहं सर्वान्पितॄनप्युदधावपि

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा

द्यावापृथिव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलिः॥4

प्रजापतेः कश्यपाय सोमाय वरुणाय च

योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलिः

नमो गणेभ्यः सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु

स्वायम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे

सोमाधारान्पितृगणान्योगमूर्तिधरांस्तथा

नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्

अग्निरूपांस्तथैवान्यान्नमस्यामि पितॄनहम्

अग्निसोममयं विश्वं यत एतदशेषतः

ये च तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तयः

जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिणः

तेभ्योऽखिलेभ्यो योगिभ्यः पितृभ्यो यतमानसः

नमोनमो नमस्तेऽस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुजः

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डेरुचिकृतपितृस्तोत्रं नामैकोननवतितमोऽध्यायान्तर्गतम्

कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः

तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः

प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्

उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्

ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्

दोहा

हे पितरेश्वर आपको,दे दियो आशीर्वाद।चरणाशीश नवा दियो,रखदो सिर पर हाथ

सबसे पहले गणपत,पाछे घर का देव मनावा जी।हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी

चौपाई

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर।चरण रज की मुक्ति सागर॥परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा।मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा॥मातृ-पितृ देव मनजो भावे।सोई अमित जीवन फल पावे

जै-जै-जै पित्तर जी साईं।पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं॥चारों ओर प्रताप तुम्हारा।संकट में तेरा ही सहारा

नारायण आधार सृष्टि का।पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का॥प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते।भाग्य द्वार आप ही खुलवाते

झुंझुनू में दरबार है साजे।सब देवों संग आप विराजे॥प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा।कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा

पित्तर महिमा सबसे न्यारी।जिसका गुणगावे नर नारी

तीन मण्ड में आप बिराजे।बसु रुद्र आदित्य में साजे

नाथ सकल संपदा तुम्हारी।मैं सेवक समेत सुत नारी

छप्पन भोग नहीं हैं भाते।शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते॥तुम्हारे भजन परम हितकारी।छोटे बड़े सभी अधिकारी

भानु उदय संग आप पुजावै।पांच अंजुलि जल रिझावे॥ध्वज पताका मण्ड पे है साजे।अखण्ड ज्योति में आप विराजे

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी।धन्य हुई जन्म भूमि हमारी॥शहीद हमारे यहां पुजाते।मातृ भक्ति सन्देश सुनाते

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा।धर्म जाति का नहीं है नारा॥हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई।सब पूजे पित्तर भाई

हिन्दु वंश वृक्ष है हमारा।जान से ज्यादा हमको प्यारा॥गंगा ये मरुप्रदेश की।पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की

बन्धु छोड़ना इनके चरणां।इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा॥चौदस को जागरण करवाते।अमावस को हम धोक लगाते

जात जडूला सभी मनाते।नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते॥धन्य जन्म भूमि का वो फूल है।जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी।सुन लीजे प्रभु अरज हमारी॥निशदिन ध्यान धरे जो कोई।ता सम भक्त और नहीं कोई

तुम अनाथ के नाथ सहाई।दीनन के हो तुम सदा सहाई॥चारिक वेद प्रभु के साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखी

नाम तुम्हारो लेत जो कोई।ता सम धन्य और नहीं कोई॥जो तुम्हारे नित पांव पलोटत।नवों सिद्धि चरणा में लोटत

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी।जो तुम पे जावे बलिहारी॥जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे।ताकी मुक्ति अवसी हो जावे

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे।सो निश्चय चारों फल पावे॥तुमहिं देव कुलदेव हमारे।तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे

सत्य आस मन में जो होई।मनवांछित फल पावें सोई॥तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।शेष सहस्र मुख सके न गाई

मैं अतिदीन मलीन दुखारी।करहु कौन विधि विनय तुम्हारी॥अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै।अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

दोहा

पित्तरौं को स्थान दो,तीरथ और स्वयं ग्राम।श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां,पूरण हो सब काम

झुंझुनू धाम विराजे हैं,पित्तर हमारे महान।दर्शन से जीवन सफल हो,पूजे सकल जहान

जीवन सफल जो चाहिए,चले झुंझुनू धाम।पित्तर चरण की धूल ले,हो जीवन सफल महान

पितरों को प्रसन्न करने के लिए सुबह-शाम को स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें. दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके बैठे और फिर पितृ कवच और पितृ स्तोत्र का पाठ श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए