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नवरात्र में नॉन-वेज दुकानों पर रोक की मांग, दुर्गा पूजा पंडालों को लेकर संतों के अलग-अलग तर्क -

🕐 10 Sep 2026, 12:21 pm• 3 min padho • Chugal Khor News
नवरात्र में नॉन-वेज दुकानों पर रोक की मांग, दुर्गा पूजा पंडालों को लेकर संतों के अलग-अलग तर्क -

अयोध्या। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और नवरात्र के दौरान मांसाहार की दुकानों और पशु बलि को लेकर संतों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। अयोध्या के संतों ने धार्मिक आयोजनों के दौरान आस्था, शास्त्रसम्मत परंपराओं और अहिंसा को लेकर अपनी-अपनी राय रखी है।

महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने नवरात्र के दौरान मांसाहार की दुकानों को बंद रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नवरात्र का पर्व करोड़ों सनातनियों की आस्था से जुड़ा है और इस दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है।

महामंडलेश्वर विष्णु दास के मुताबिक, नवरात्र के दौरान पूजा स्थलों और धार्मिक आयोजनों के आसपास मांसाहार की दुकानें खुले रहने से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। उन्होंने नवरात्र की पूरी अवधि में ऐसी दुकानों को बंद रखने की मांग की।

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने पशु बलि को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनके मत के अनुसार बेजुबान और निर्दोष पशुओं की बलि शास्त्रसम्मत नहीं है।

उनका कहना है कि सनातन परंपरा में जीवों के प्रति करुणा और संरक्षण का भाव होना चाहिए। धार्मिक आयोजनों में भी जीवों के प्रति दया और संवेदना को महत्व दिया जाना चाहिए।

वहीं, साकेत भवन अयोध्या के महंत सीताराम दास जी महाराज ने भी पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास मांसाहार और पशु बलि को लेकर अपनी बात रखी। हालांकि, उन्होंने आस्था के नाम पर हिंसा को उचित ठहराए जाने पर सवाल उठाया।

महंत सीताराम दास ने कहा कि मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और आस्था का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी भी धार्मिक तर्क को हिंसा के समर्थन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने ‘अहिंसा परमो धर्मः’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हों या विवाद की स्थिति पैदा हो।

महंत सीताराम दास ने कहा कि यदि मां दुर्गा के प्रति प्रेम और श्रद्धा की बात हो रही है तो उसके पीछे दिए जाने वाले तर्क भी शास्त्रसम्मत और न्यायसंगत होने चाहिए।

उन्होंने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास ऐसे कृत्यों पर रोक लगाने की पैरवी की, जिन्हें धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला माना जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

महंत सीताराम दास ने कहा कि धार्मिक पीठ के पीठाधीश्वर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे संतों से समाज संयमित, सकारात्मक और शास्त्रसम्मत विचारों की अपेक्षा करता है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य श्रद्धा और आस्था को मजबूत करना होना चाहिए। ऐसे में आयोजनों के दौरान विवाद की स्थिति पैदा करने वाले किसी भी कृत्य से बचना जरूरी है।

नवरात्र के दौरान मांसाहार और पशु बलि का मुद्दा धार्मिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग मतों का विषय रहा है। अयोध्या के दोनों संतों के बयानों में भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग तर्क सामने आए हैं। एक ओर मांसाहार की दुकानों को बंद करने और पशु बलि पर रोक की मांग की गई है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक आस्था के नाम पर हिंसा को उचित ठहराने से बचने और कानून का पालन करने पर जोर दिया गया है।

स्रोत: Filmitics

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