Download APKAPK
होम समाचार देश राजनीति अपराध खेल धर्म मनोरंजन व्यापार टेक लाइफस्टाइल विदेश लखनऊ
विदेश Breaking

नेपाल में जिस 'ग्लेशियल लेक' के फटने का ख़तरा है, उसके बारे में क्या पता है

🕐 02 Sep 2026, 05:01 pm• 4 min padho • Chugal Khor News
नेपाल में जिस 'ग्लेशियल लेक' के फटने का ख़तरा है, उसके बारे में क्या पता है

नेपाल में 26 अगस्त को भारी तबाही के बाद उस क्षेत्र में एक झील बन गई है जिसके फटने का ख़तरा बना हुआ है. अगर ये झील फटी तो इसका क्या असर नेपाल में हो सकता है?

नेपाली अधिकारियों ने चीन के जल संसाधन मंत्रालय का हवाला देते हुए बीबीसी को बताया है कि रसुवा में स्थित ग्लेशियल लेक यानी 'लेक टू' में पानी भरना जारी है

बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के प्रमुख और सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट बिनोद पराजुली ने कहा कि चीनी आंकड़ों के मुताबिक़ इस ग्लेशियल लेक में 31 अगस्त तक अनुमानित 650,000 घन मीटर पानी जमा हो गया है

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ नेपाली को बताया, "यह ग्लेशियल लेक भरी है. इसलिए इसके फटने का ख़तरा है."

पराजुली ने बचाव कर्मियों, ख़ासकर जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में तैनात कर्मियों को, लेक के फटने की स्थिति के मद्देनज़र सतर्क रहने के लिए कहा है

अधिकारियों का कहना है कि यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि इस ग्लेशियल लेक के भरने और फटने में कितना समय लगेगा

ये झील कहां है और कैसी है

अधिकारियों के मुताबिक़, 30 अगस्त को जो ग्लेशियर टूटा था, वो नेपाल-चीन सीमा पर स्थित था, जबकि यह झील नेपाली क्षेत्र के अंदर है

पृथ्वी राजमार्ग के किनारे कृष्णा भीर इलाक़े में कटाव 30 अगस्त को झील फटने की वजह से आई बाढ़ का नतीजा माना जा रहा है

सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट पराजुली के अनुसार, नया ग्लेशियल लेक लांगटांग लिरुंग हिमालय के पश्चिमी ढलान पर, रसुवा में तेनजिंग नाम की जगह के ठीक सामने स्थित है

पेशाब करने के बाद फिर से बूंद-बूंद टपकना, किस बीमारी के लक्षण और क्या है इलाज

नेपाल के पीएम बालेन शाह ने संसद में भारत और चीन को लेकर क्या कहा

नेपाल बाढ़: वायरल हुए इस सीसीटीवी फ़ुटेज के बाद यहां क्या हुआ

स्वरा भास्कर ने क्या 'जौहर को कायरता' बताया था, अब क्या बोलीं

उन्होंने कहा, "यह रविवार, 30 अगस्त की सुबह फटी लेक से लगभग तीन गुना छोटा है. यह तीन तरफ से चट्टानों से घिरा हुआ और एक तरफ से थोड़ा खुला हुआ लगता है."

उन्होंने कहा कि पहाड़ों के बीच स्थित 'लेक टू' ग्लेशियर की अनुमानित ऊंचाई 4,000 मीटर है

पराजुली ने कहा, "यह उस क्षेत्र से नीचे है जहां 26 अगस्त को हिमस्खलन हुआ था और नदी से काफ़ी ऊपर है. यही कारण है कि यह तेज़ी से नहीं भर रहा है. ग्लेशियर से पिघला हुआ पानी धीरे-धीरे इसमें जमा हो रहा है."

उन्होंने बताया कि इस गोलाकार ग्लेशियल लेक का क्षेत्रफल 0.3 वर्ग किलोमीटर है

पराजुली के अनुसार, इसकी गहराई का अनुमान लगाना कठिन है

उन्होंने कहा, "गहराई ज़रूरी है क्योंकि इससे पानी का एरिया नहीं, बल्कि वॉल्यूम बढ़ता है. जब पानी के क्यूबिक मीटर का हिसाब लगाया जाता है, तो गहराई लगभग 10 मीटर हो सकती है."

नेपाल बाढ़: वायरल हुए इस सीसीटीवी फ़ुटेज के बाद यहां क्या हुआ?8 घंटे पहले

तिब्बत में मची तबाही की असल हक़ीक़त क्या चीन बाहर नहीं आने दे रहा है?1 सितंबर 2026

यह झील कितनी ख़तरनाक़ है

अधिकारियों के मुताबिक़, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल की ओर 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी बहकर आया था

पराजुली ने बताया कि मौजूदा ग्लेशियल लेक में पानी की मात्रा तुलनात्मक रूप से बहुत कम है

उन्होंने कहा, "लेकिन, निचले इलाके़ में छोटे भूस्खलन और नदी के क्षेत्र में मिट्टी का बहाव होता है और नाले होते हैं, इसलिए ख़तरा है कि अगर यह लेक फटी, तो वे सभी नाले बड़ा रूप ले सकते हैं."

इसलिए, सुरक्षा कर्मियों के लिए सतर्क रहना ज़रूरी है. ख़ासकर सुरंग क्षेत्र में बचाव कार्यों में जुटे लोगों के लिए और निचले क्षेत्रों में मृतकों और लापता लोगों की तलाश करने वालों के लिए सतर्कता ज़रूरी है

उन्होंने बताया कि अगर यह ग्लेशियल लेक फटती है, तो इसके 26 अगस्त की बाढ़ से प्रभावित इलाक़ों से आगे जाने की संभावना नहीं है

नेपाल की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने का ऑपरेशन ख़तरनाक क्यों है?1 सितंबर 2026

नेपाल: ग्लोबल वार्मिंग का 'ज़िम्मेदार' नहीं फिर भी आपदाओं का शिकार, क्या ये है वजह1 सितंबर 2026

सीनियर हाइड्रोलाजिस्ट पराजुली के मुताबिक़, उस पाइंट से जहां से हिमस्खलन शुरू हुआ और 26 अगस्त को नीचे की और बहना शुरू हुआ, तब से कई भूस्खलन रिकार्ड किए गए हैं

उन्होंने ख़तरे के बारे में चेतावनी देते हुए कहा, "एकमात्र लेक जिसके फटने का ख़तरा है, वह लेक टू है, जो हाल ही में बना है. एक अतिरिक्त रिस्क यह है कि भूस्खलन कभी भी हो सकता है और ऐसी ख़बरें हैं कि इसका कई स्तरों पर प्रभाव पड़ सकता है."

पराजुली के अनुसार, आमतौर पर जब लेक भर जाते हैं, तो दबाव बनता है और उनके फटने का ख़तरा होता है

उन्होंने कहा, "लीकेज के कारण, कुछ ग्लेशियल लेक एक-दो दिनों के बाद फट जाते हैं. लेक टू भरने की प्रक्रिया में है, इसलिए इसके फटने का ख़तरा है."

स्रोत: BBC News हिन्दी

शेयर करें X / Twitter ← होम

और खबरें