तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ…
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट के सामने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें दोनों गुटों को पार्टी के पारंपरिक नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग ने इस विवाद पर जून में सुनवाई शुरू की थी। ममता बनर्जी गुट ने जुलाई में आयोग के सामने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया था। सिब्बल के मुताबिक, इसके बाद आयोग ने कई महीनों तक इस मामले में कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जैसे ही पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी हुई, चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने का आदेश जारी कर दिया। इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं।
सुप्रीम कोर्ट से तत्काल रोक लगाने की मांग
कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग हर दिन नए मापदंड तय कर रहा है। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सिब्बल को रोकते हुए कहा कि फिलहाल मामले के गुण-दोष पर बहस न की जाए। उन्होंने कहा कि जब मामला सुनवाई के लिए आएगा, तब दूसरे पक्ष को भी अपनी दलील रखने का पूरा मौका मिलेगा। कोर्ट ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए लेने का भरोसा दिया। तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। ऋतब्रत बनर्जी गुट का दावा है कि पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे का कार्यकाल खत्म हो चुका है और उसे जारी रखना वैध नहीं है। वहीं, ममता बनर्जी गुट इस दावे को खारिज करता है और अपने संगठनात्मक ढांचे को वैध मानता है। इसी विवाद के चलते मामला चुनाव आयोग के सामने पहुंचा।
EC ने दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए
6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी किया। इसके तहत दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पारंपरिक ‘जोड़ा फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया गया। आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू की गई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।






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