गुरुकुलम भारत की ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ एकीकृत करने वाला एक मजबूत केंद्र बनकर उभरेगा: सीएम धामी

हरिद्वार, सितंबर 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को हरिद्वार के औरंगाबाद गांव में पतंजलि कल्याण योगग्राम में पहले पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम के उद्घाटन समारोह में भाग लिया।

गुरुकुलम के शुभारंभ पर योग गुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और पूरे पतंजलि परिवार को बधाई देते हुए धामी ने कहा कि यह संस्थान भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ एकीकृत करने का एक मजबूत केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम की स्थापना भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक युग से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

धामी ने कहा कि भारत की गुरुकुलम परंपरा ने हजारों वर्षों से ज्ञान, मूल्यों, अनुशासन और चरित्र निर्माण की नींव के रूप में काम किया है। पारंपरिक गुरुकुलों में छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान दिया जाता था, बल्कि जीवन जीने की कला और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियाँ भी सिखाई जाती थीं।

उन्होंने कहा कि "सा विद्या या विमुक्तये" का सिद्धांत भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा की नींव रहा है। उन्होंने कहा, सच्ची शिक्षा वह है जो व्यक्ति को अज्ञानता, भय और संकीर्णता से मुक्त कर उसके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सके।

धामी ने विश्वास जताया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम भारत की ज्ञान परंपरा को युवा पीढ़ी तक ले जाने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों के साथ आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के एकीकरण से छात्रों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में गुरुकुलम शिक्षा की प्रासंगिकता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ मूल्यों, अनुशासन और संतुलित जीवनशैली की शिक्षा जरूरी है

धामी ने योग, आयुर्वेद, शिक्षा, अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के योगदान को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव ने देश भर में योग को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद के अध्ययन, अनुसंधान और प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।