मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट नंबर 396 पिछले डेढ़ दशक में राजनीतिक बदलाव का अहम उदाहरण रही है। 2002, 2007 और 2012 में समाजवादी पार्टी क…
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट नंबर 396 पिछले डेढ़ दशक में राजनीतिक बदलाव का अहम उदाहरण रही है। 2002, 2007 और 2012 में समाजवादी पार्टी के कैलाश चौरसिया लगातार विधायक रहे, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के रत्नाकर मिश्रा की जीत के साथ सीट का राजनीतिक समीकरण बदल गया। 2022 में भी बीजेपी ने यहां अपनी जीत बरकरार रखी। अब 2027 के चुनाव से पहले नजर इस बात पर है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़े किस तरह की राजनीतिक तस्वीर दिखाते हैं।
2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के कैलाश चौरसिया ने बसपा के रंगनाथ मिश्रा को 22,299 वोटों के अंतर से हराया था। इससे पहले भी 2002 और 2007 में कैलाश चौरसिया इस सीट से जीत दर्ज कर चुके थे। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन चुनाव सपा के खाते में गए।लेकिन 2017 में चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के रत्नाकर मिश्रा ने सपा के कैलाश चौरसिया को 57,412 वोटों के अंतर से हराया। रत्नाकर मिश्रा को 1,09,196 वोट मिले, जबकि कैलाश चौरसिया को 51,784 वोट हासिल हुए। इसी चुनाव में बसपा के मोहम्मद परवेज खान को 49,955 वोट मिले।इस परिणाम ने मिर्जापुर नगर की सियासत में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया और सपा के लंबे प्रभाव के बाद बीजेपी को सीट पर मजबूत स्थिति मिली।
2022 में रत्नाकर मिश्रा ने दोबारा जीत दर्ज की। उन्हें 1,18,642 वोट मिले, जबकि सपा के कैलाश चौरसिया को 78,766 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 39,876 वोट रहा। बीजेपी का वोट शेयर करीब 52.1 प्रतिशत और सपा का करीब 34.6 प्रतिशत रहा।हालांकि 2022 का अंतर 2017 के 57,412 वोट के मुकाबले कम था। यानी बीजेपी ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की, लेकिन दोनों चुनावों के बीच जीत के अंतर में करीब 17,500 वोट की कमी आई।
मिर्जापुर नगर की राजनीति में ब्राह्मण, चौरसिया सहित विभिन्न ओबीसी समूहों, वैश्य, पटेल-कुर्मी, बिंद-निषाद, दलित और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका पर चर्चा होती है। हालांकि विधानसभा स्तर पर इन समुदायों की सटीक और मौजूदा जातिवार संख्या का आधिकारिक सार्वजनिक डेटा उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी भी समुदाय को निश्चित संख्या या स्थायी वोट बैंक मानना उचित नहीं होगा।
2027 की चुनावी बहस में विंध्य क्षेत्र का विकास, धार्मिक पर्यटन, सड़क और बुनियादी सुविधाएं, रोजगार, व्यापार और स्थानीय समस्याएं जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। साथ ही उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ और दलों का संगठनात्मक प्रदर्शन भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करने वाले कारक होंगे।मिर्जापुर नगर की पिछली तीन विधानसभा तस्वीरों को देखें तो 2012 में सपा, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी विजेता रही। ऐसे में 2027 का चुनाव इस सीट के पिछले राजनीतिक बदलावों और नए मुद्दों के बीच एक और महत्वपूर्ण अध्याय होगा।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।






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