Mahalaxmi Vrat 2026: महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ 19 सितंबर से शुरू हो चुका है. ये व्रत 3 अक्टूबर तक रखें जाएंगे. क्या आप जानते हैं हर कोई इस व्रत को नहीं रख सकत…
Mahalaxmi Vrat 2026: महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ 19 सितंबर से शुरू हो चुका है. ये व्रत 3 अक्टूबर तक रखें जाएंगे. क्या आप जानते हैं हर कोई इस व्रत को नहीं रख सकता है. चलिए जानते हैं किन लोगों को यह उपवास करना चाहिए और किन्हें इससे बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और बरकत आती है. इन व्रतों को रखने से देवी मां प्रसन्न होती है. महालक्ष्मी व्रत परंपरागत रूप से 16 दिनों के व्रत हैं. ये भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होते हैं और आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक चलते हैं. आइए जानते हैं इस व्रत को कौन-कौन कर सकता है और व्रत से जुड़े जरूरी नियम
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत स्त्री और पुरुष, दोनों ही कर सकते हैं. परिवार का हर सदस्य इन व्रतों का पालन कर सकता है. जो व्यक्ति माता लक्ष्मी की कृपा पाना चाहता है, उन्हें इस व्रत को करने का संकल्प लेना चाहिए तथा श्रद्धा के साथ उपवास व पूजन करना चाहिए
महालक्ष्मी व्रत घर की महिलाएं या परिवार का कोई भी सदस्य, जो अपने घर में सुख-शांति, वैभव और समृद्धि की आशा रखता है. वह इन व्रतों को रख सकता है
धार्मिक मान्यता है कि जिन लोगों के ऊपर कोऊ कर्ज का बोझ है या फिर व्यापार में घाटा हो रहा हो और घर में धन नहीं टिक पा रहा हो, तो उन्हें भी महालक्ष्मी व्रत करना चाहिए. इससे उन्हें विशेष फलों की प्राप्ति होती है
माता लक्ष्मी के वो भक्त, जो 16 दिनों तक उनकी श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा-अर्चना कर सकते हैं, उन्हें भी भाद्रपद मास के ये महालक्ष्मी व्रत रखने चाहिए
यदि घर में किसी की मृत्यु या सूतक हो या किसी का जन्म का अशौच चल रहा हो तो महालक्ष्मी व्रत नहीं करना चाहिए. इस अवधि में इन व्रतों तथा कलश स्थापना शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक जानकारों की सलाह लेनी जरूरी है
महालक्ष्मी व्रत 16 दिनों तक चलने वाला लंबा व्रत होता है. अक्सर लोग इतनी लंबी अवधि तक अन्न का त्याग नहीं कर सकते हैं. ऐसे में जिनकी सेहत थोड़ी हल्की है या वे किसी प्रकार की दवाएं नियमित रूप से ले रहे हैं, तो उन्हें भी इन व्रतों का पालन नहीं करना चाहिए. ये उपवास आपके स्वास्थ्य को ज्यादा गंभीर बना सकते हैं
यदि कोई व्यक्ति लगातार 16 दिनों तक इन कठिन व्रतों का पालन नहीं कर सकता है तो वह इस अवधि में अपनी श्रद्धा के अनुसार, माता लक्ष्मी की पूजा कर सकता है. उनके मंत्रों का जाप कर सकता है. इसके अलावा, अंतिम दिन का या फिर 3 दिन का व्रत भी रख सकते हैं
1.कलाई पर डोरा- इस व्रत के पहले दिन आपको 16 गांवों वाला पवित्र डोरा बनाया जाता है. इस डोरे को पुरुष दाहिनी कलाई पर और महिलाएं अपनी बाईं कलाई पर बांधती हैं
2.सात्विकता- 16 दिनों के महालक्ष्मी व्रत के दौरान आपको सात्विक्ता और शुद्धता का ख्याल रखना होता है. इसमें भोजन या फलाहार शुद्ध होना चाहिए
3.अन्न का त्याग- इन दिनों में आपको अन्न का सेवन नहीं करना होता है
4.पूजन- इन 16 दिनों में आपको सुबह और शाम, दोनों समय विधि-विधान से माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)



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