Sonam Wangchuk: लद्दाख के प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हाल ही में अपने सुरक्षा कारणों को लेकर एक अत्यंत चिंताजनक बयान दिया है. लद्दाख में हुई हिंसक…
Sonam Wangchuk: लद्दाख के प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हाल ही में अपने सुरक्षा कारणों को लेकर एक अत्यंत चिंताजनक बयान दिया है. लद्दाख में हुई हिंसक घटनाओं को एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए, वांगचुक ने सार्वजनिक रूप से अपने एनकाउंटर की आशंका व्यक्त की है. उनका कहना है कि उन्हें कई स्रोतों से जान से मारे जाने की चेतावनियां मिल रही हैं, लेकिन वे देश को जागरूक करने के लिए किसी भी परिणाम का सामना करने को तैयार हैं. दिल्ली में पूर्व में की गई अपनी भूख हड़ताल का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले उन्हें जेल भेजा गया और अब उन्हें मुठभेड़ में खत्म किए जाने का डर सता रहा है
अपनी सभा के दौरान सोनम वांगचुक ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और उनके इस्तीफे की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख में सुरक्षा बलों द्वारा स्थानीय प्रदर्शनकारी युवाओं पर एके-47 जैसे घातक स्वचालित हथियारों का प्रयोग किया गया, जिसके चलते लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. वांगचुक ने पूर्व में हुई हिंसा से जुड़ी न्यायिक जांच रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक करने का आग्रह किया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस रिपोर्ट को सामने नहीं लाती है, तो स्थानीय स्तर पर एक स्वतंत्र जन न्यायाधिकरण गठित कर पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी
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गृह मंत्री की आलोचना करने के साथ-साथ वांगचुक ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि राहुल गांधी देश के अन्य हिस्सों में छात्रों पर बल प्रयोग की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन लद्दाख के गंभीर मुद्दे पर उनकी चुप्पी समझ से परे है. वांगचुक का मानना है कि जब लद्दाख में सीधे सिर और सीने पर गोलियां चलाई गईं, तब विपक्ष के शीर्ष नेताओं को भी उतनी ही मजबूती से स्थानीय लोगों के अधिकारों और सुरक्षा के पक्ष में खड़ा होना चाहिए था
लद्दाख के ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए वांगचुक ने कहा कि इस क्षेत्र ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार में विश्वास जताते हुए देश के साथ रहने का निर्णय लिया था. हालांकि, वर्तमान में लद्दाख के भीतर भय और दमन का जो वातावरण निर्मित हुआ है, वह उन सभी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के पूरी तरह विपरीत है. उन्होंने वर्ष 2014 से 2019 के दौर की तुलना करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में किए गए वादों को तोड़ा गया है, जिससे क्षेत्र की जनता में भारी निराशा और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है
हिंसा की पहली बरसी के अवसर पर लेह और लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों में पूर्ण रूप से बंद का माहौल देखा गया. भारी सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के चलते सभाओं में आम जनता की उपस्थिति भले ही कम रही हो, लेकिन वांगचुक के अनुसार इसे आंदोलन की विफलता नहीं माना जा सकता. वहीं दूसरी ओर, लद्दाख पुलिस ने इन तमाम आरोपों को पूरी तरह से निराधार और भ्रामक बताया है. पुलिस प्रशासन का दावा है कि दिवंगतों की याद में आयोजित प्रार्थना सभाओं में शामिल होने से किसी भी नागरिक को रोका नहीं गया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है
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