ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में एक जोरदार भाषण दिया. उन्होंने अपने देश पर आतंकवाद के अम…

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में एक जोरदार भाषण दिया. उन्होंने अपने देश पर आतंकवाद के अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान खुद "आतंकवाद का शिकार" है. पोडियम से बोलते हुए, पेज़ेश्कियान ने मिनाब स्कूल हमले में मारे गए छात्रों और मारे गए सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की तस्वीरें साझा की. आक्रामकता के आरोपों का जवाब देते हुए अपने भाषण की शुरुआत करते हुए पेज़ेश्कियान ने UNGA में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों का जिक्र किया

पेजेशकियन ने कहा, "अमेरिका के राष्ट्रपति ने हमें आतंकवादी कहा है. ईरान ने बीते 200 सालों में किसी पर हमला नहीं किया है, लेकिन अब हम पर इलाके में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है. हमें आतंकवादी कहा जा रहा है. हम खुद आतंकवाद का शिकार हो रहे हैं. हमारे नेता की हत्या कर दी गई. जो लोग खुद आतंकवादी हैं, वे हमें आतंकवादी कहते हैं. इजराइल हमारे लोगों को निशाना बनाता रहा है. हमने जवाब दिया, लेकिन आम नागरिकों की इमारतों पर हमला नहीं किया. ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है

इजरायल गाजा में एक आतंकवादी की तरह व्यवहार कर रहा है. वे गाजा में आतंकवाद को फैला रहा है. उन्होंने आगे कहा, "हम आतंकवाद के शिकार हो रहे हैं. मैं ऐसे ईरान से आता हूं. जहां हमारे सम्मानित सर्वोच्च नेता की हत्या बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के कारण कर दी गई. मैं ऐसे ईरान से आता हूं जहां सचमुच एक स्कूल पर बम गिराया गया था. देखिए, ये बच्चे; ये बच्चे अमेरिका और इजरायल के हथियारों से गिराए गए बमों की चपेट में आकर मारे गए. वे बेगुनाह थे, उन्होंने कोई अपराध नहीं किया था."

उन्होंने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के बारे में बात की. उन्होंने कहा, "हमारे समाज में बीमार, बेगुनाह लोग, गरीब और सबसे कम सुविधा वाले लोग ही इन प्रतिबंधों का शिकार हो रहे हैं." पेजेश्कियन ने कहा, "विदेशी हमलों ने देश भर में जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया,वे आस-पास के इलाकों में आए और हमारे विश्वविद्यालयों, हेल्थकेयर सेंटरों, स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया. यह सब अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है. अमेरिका ने कई वॉरहेड वाले हथियारों का भी इस्तेमाल करके उसके स्पोर्ट्स हॉल को निशाना बनाया. उन्होंने हमारे वैज्ञानिकों, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या कर दी. ऐसे बेगुनाह बच्चे, जिन्होंने असल में कोई अपराध या पाप नहीं किया था. अमेरिका अपने नाजायज मकसद पूरे करने के लिए किसी देश की आबादी की बलि देना चाहता है."