NSE IPO: पिछले हफ्ते जब आपने NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के IPO के लिए अप्लाई किया होगा, तो आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि आखिर यह सारा पैसा जाएगा कहां…

NSE IPO: पिछले हफ्ते जब आपने NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के IPO के लिए अप्लाई किया होगा, तो आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि आखिर यह सारा पैसा जाएगा कहां? इसका जवाब सामने आ चुका है. एक्सचेंज की ऑफिशियल फाइलिंग्स के मुताबिक, NSE IPO को हैंडल करने वाले 20 इनवेस्टमेंट बैंकर्स ने मिलकर फीस और कमीशन के तौर पर कुल ₹186.20 करोड़ कमाए हैं. जी हां, केवल IPO प्रोसेस मैनेज करने के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च हुई है. यह पैसा कैसे खर्च हुआ, किसे कितना पैसा मिला, और क्या यह फीस दूसरे बड़े IPOs के मुकाबले जायज है? आइए विस्तार से समझते हैं

NSE का यह IPO ₹22,561.5 करोड़ का था, जो इसे भारत के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा IPO बनाता है. हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) के ₹27,000 करोड़ के IPO के बाद, जो इसी साल पहले आया था. इस पूरी रकम में से NSE ने कुल ऑफर-रिलेटेड खर्च ₹392.12 करोड़ बताया है. यह कुल ऑफर साइज का 1.74% बैठता है. अब आपको लग सकता है कि ₹392 करोड़ बहुत बड़ी रकम है, और आप सही भी हैं. यह बड़ी रकम ही है. लेकिन इसे सही परिप्रेक्ष्य में समझना जरूरी है

₹392.12 करोड़ के कुल खर्च में से ₹186.20 करोड़ यानी 47.49% हिस्सा 20 इनवेस्टमेंट बैंकर्स के पास गया. यह ओवरऑल इश्यू साइज का 0.82% बैठता है. यानी IPO के कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा उन्हीं बैंकों के पास गया, जिन्होंने पूरी प्रोसेस मैनेज की. लेकिन यहां एक दिलचस्प बात है. भले ही NSE का IPO अब तक का दूसरा सबसे बड़ा IPO है, फिर भी बैंकर्स की फीस सबसे ज्यादा फीसों में शुमार नहीं है. कैसे, आइए देखते हैं

हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) का IPO साइज ₹27,000 करोड़ था और उसके बैंकर की फीस ₹493 करोड़ रही. पेटीएम (Paytm) यानी One97 Communications का IPO साइज ₹18,300 करोड़ था और बैंकर फीस ₹323 करोड़ रही. LG Electronics का IPO साइज ₹10,500 करोड़ था और बैंकर फीस ₹226 करोड़ रही. वहीं NSE का IPO साइज ₹22,561 करोड़ होने के बावजूद बैंकर फीस सिर्फ ₹186 करोड़ रही. इस हिसाब से NSE ने Hyundai और Paytm के मुकाबले अपने बैंकर्स को काफी कम फीस दी, जबकि इसका IPO साइज Paytm और LG दोनों से बड़ा था

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बैंकों ने कम फीस इसलिए स्वीकार की क्योंकि यह एक प्रतिष्ठित डील थी. NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है. मार्केट में इसकी हाई विजिबिलिटी थी और एक ऐतिहासिक ट्रांजैक्शन पर काम करने का यह एक बड़ा मौका था. दूसरे शब्दों में कहें तो बैंक इस डील से जुड़ी प्रतिष्ठा के लिए फीस में कटौती के लिए तैयार हो गए

इस डील में फाइनेंस की कुछ सबसे बड़ी कंपनियां शामिल हैं. भारतीय बैंकों में कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस कैपिटल और Motilal Oswal Investment Advisors शामिल हैं. वहीं ग्लोबल दिग्गजों में Morgan Stanley India, Citigroup Global Markets, HSBC Securities और J P Morgan India का नाम शामिल है. इनके अलावा 10 और बैंक भी इस लिस्ट में शामिल रहे. हर बैंक का इंडिविजुअल हिस्सा अभी सामने नहीं आया है. लेकिन आमतौर पर लीड मैनेजर्स को सबसे बड़ा हिस्सा मिलता है. जबकि को-मैनेजर्स को छोटा हिस्सा मिलता है

बैंकर फीस के बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग पर हुआ. NSE ने IPO को प्रमोट करने के लिए ₹49.69 करोड़ खर्च किए, जो कुल खर्च का 12.67% बैठता है. जरा सोचिए, सिर्फ निवेशकों को शेयर खरीदने के लिए राजी करने के लिए विज्ञापनों, ब्रोशर्स, रोडशो और मार्केटिंग मैटीरियल पर लगभग ₹50 करोड़ खर्च कर दिए गए. क्या यह खर्च सही साबित हुआ? सब्सक्रिप्शन के आंकड़े देखें तो जवाब हां में मिलता है

NSE का IPO सोमवार, 21 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए बंद हुआ. ओवरऑल सब्सक्रिप्शन 5.71 गुना रहा. कुल डिमांड ₹90 हजार करोड़ से ज्यादा की रही. ऑफर पर 8.86 करोड़ शेयर रखे गए थे, जिनके मुकाबले 50.58 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां आईं. इसका मतलब यह है कि शेयर ओवरसब्सक्राइब हुआ

क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) यानी म्यूचुअल फंड्स, इंश्योरेंस कंपनियां और विदेशी निवेशक जैसे बड़े खिलाड़ी इस IPO में बिल्कुल टूट पड़े. QIB कैटेगरी में उनके रिजर्व्ड हिस्से के मुकाबले 12.68 गुना सब्सक्रिप्शन आया. यानी केवल 2.52 करोड़ शेयर रिजर्व होने के बावजूद 32 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाई गईं. बाकी कैटेगरीज की बात करें तो नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) में 6.55 गुना, रिटेल इंडिविजुअल इनवेस्टर्स (RII) में 1.39 गुना, और एम्प्लॉयीज कैटेगरी में 2.40 गुना सब्सक्रिप्शन देखने को मिला

IPO के पब्लिक होने से पहले ही, NSE ने 189 एंकर इनवेस्टर्स से ₹6,746 करोड़ जुटा लिए थे. ये बड़े और भरोसेमंद निवेशक होते हैं, जो IPO खुलने से पहले ही शेयर खरीदने की प्रतिबद्धता जताते हैं, जिससे रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ता है. इसमें शामिल बड़े नामों में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और नॉर्वे का Government Pension Fund Global शामिल हैं. इनके अलावा कई और डोमेस्टिक और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स भी इसमें शामिल रहे. इस एंकर बुक ने IPO को तुरंत एक क्रेडिबिलिटी दी और इसी वजह से इतना जबरदस्त 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन देखने को मिला

गौर करने वाली बात यह है कि ये एक फ्रेश इश्यू नहीं था. ऑफर फॉर सेल था. यानी खुद NSE को इस IPO से एक भी रुपया नहीं मिलेगा. क्यों? क्योंकि ऑफर फॉर सेल में मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपने पुराने शेयर बेचते हैं, जिससे पैसा सेलिंग शेयरहोल्डर्स के पास जाता है. NSE के मामले में सेलिंग शेयरहोल्डर्स में NSE के प्रमोटर शेयरहोल्डर्स जैसे LIC और वो दूसरे इंस्टीट्यूशनल निवेशक शामिल हैं, जो अपनी हिस्सेदारी से बाहर निकलना चाहते थे

NSE के शेयर 24 सितंबर 2026 को BSE (Bombay Stock Exchange) पर लिस्ट होने वाले हैं. 23 सितंबर तक ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड पर करीब 2.5-4% के आसपास बना हुआ है. सीधी भाषा में समझें तो अगर आपको अलॉटमेंट मिला है, तो लिस्टिंग डे पर आपको एक मामूली 2.5-4% का फायदा देखने को मिल सकता है

Desclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें