फिल्म:'महाकाव्य श्री रामायण कथा'स्टार कास्ट: अंजलि अरोड़ा, देव शर्मा, रजनीश दुग्गल स्टार्स : 3.5

रामायण की कहानी हमारे देश की संस्कृति और आस्था से बेहद गहराई से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि जब भी रामायण को फिल्म या सीरियल के जरिए पर्दे पर लाने की कोशिश होती है, दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ जाती हैं. अब इसी कड़ी में नई फिल्म Mahakavya Shri Ramayan Katha सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है

फिल्म की अनाउंसमेंट के बाद से ही इसे लेकर काफी चर्चा थी. खासकर अंजलि अरोड़ा के माता सीता के किरदार में नजर आने को लेकर सोशल मीडिया पर खूब बातें हुईं. फिल्म की कास्टिंग से लेकर VFX तक को लेकर लोगों ने कई तरह के सवाल भी उठाए. लेकिन अब फिल्म देखने के बाद सवाल ये है कि क्या ये फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतरती है

फिल्म की कहानी भगवान श्री राम की उस यात्रा को दिखाती है, जिसे हम बचपन से सुनते और देखते आए हैं. कहानी अयोध्या से शुरू होती है, जहां श्री राम के राजतिलक की तैयारियां चल रही होती हैं, लेकिन हालात बदलते हैं और उन्हें वनवास जाना पड़ता है

इसके बाद कहानी पंचवटी, माता सीता के हरण, हनुमान जी से मुलाकात, वानर सेना और लंका तक पहुंचती है. आखिर में राम और रावण के बीच धर्म और अधर्म की लड़ाई के साथ कहानी अपने क्लाइमैक्स तक पहुंचती है

यानी फिल्म में रामायण के लगभग सभी बड़े और महत्वपूर्ण पड़ावों को समेटने की कोशिश की गई है. अच्छी बात ये है कि कहानी को बहुत ज्यादा complicated बनाने की कोशिश नहीं की गई

सबसे ज्यादा चर्चा अंजलि अरोड़ा की हो रही थी और फिल्म देखने के बाद कहना होगा कि उन्होंने माता सीता के किरदार को काफी sincerity के साथ निभाने की कोशिश की है. उनके एक्सप्रेशन और इमोशनल सीन्स फिल्म में अच्छे लगते हैं

वहीं देव शर्मा ने भगवान श्री राम के किरदार में काफी शांत और संयमित अंदाज अपनाया है. उनकी dialogue delivery loud होने के बजाय soft रखी गई है, जो इस किरदार के लिए suit करती है

रजनीश दुग्गल रावण के रोल में काफी दमदार नजर आते हैं. उनके सीन्स में एक अलग एनर्जी दिखाई देती है और उनका स्क्रीन प्रेजेंस भी ध्यान खींचता है

डायरेक्टर अभिषेक सिंह ने फिल्म को जरूरत से ज्यादा मॉर्डन बनाने के बजाय traditional presentation पर ज्यादा भरोसा किया है. यही चीज फिल्म को एक फैमिलियर फील देती है

Screenplay की बात करें तो फिल्म की कहानी को ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं की गई है. बड़े घटनाक्रम जल्दी-जल्दी सामने आते हैं, जिसकी वजह से फिल्म काफी एक्सेसिबल बनी रहती है. हालांकि कुछ जगहों पर कहानी और बेहतर तरीके से develop की जा सकती थी. कुछ घटनाएं थोड़ी जल्दबाजी में आगे बढ़ती हुई महसूस होती हैं

अब बात उस चीज की, जिसने फिल्म को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है VFX. रामायण जैसे बड़े canvas वाली कहानी में visuals का बहुत बड़ा रोल होता है. फिल्म में कुछ scenes अच्छे लगते हैं, लेकिन कई जगह VFX की finishing साफ तौर पर कमजोर नजर आती है

खासकर बड़े युद्ध और कुछ larger-than-life sequences में वो grandness देखने को नहीं मिलती, जिसकी उम्मीद ऐसी फिल्म से की जाती है.अगर VFX और technical detailing पर थोड़ा और काम किया जाता, तो फिल्म का overall impact काफी बेहतर हो सकता था

तो क्या ‘Mahakavya Shri Ramayan Katha’ देखनी चाहिए

अगर आप रामायण की कहानी को एक स्ट्रेट फॉरवर्ड और इमोशनल अंदाज में देखना चाहते हैं, तो फिल्म आपको कुछ हिस्सों में पसंद आ सकती है. एक्टर्स ने अपनी तरफ से ईमानदार कोशिश की है और फिल्म का म्यूजिक भी कहानी के मूड को सपोर्ट करता है

लेकिन कमजोर VFX, कुछ जल्दबाजी वाले पॉर्शन और technical limitations फिल्म को एक शानदार cinematic experience बनने से रोकते हैं

Overall, ‘Mahakavya Shri Ramayan Katha’ एक एवरेज कोशिश है, जिसमें कलाकारों की मेहनत और कहानी की इमोशनल स्ट्रेंथ तो नजर आती है, लेकिन विजुअल्स और एग्जीक्यूशन की कमी इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है