Lucknow News: लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं, शिक्षा और रा…

Lucknow News: लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश का युवा भारत के भविष्य को दिशा देने वाला है और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत करें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “हमारा युवा ही भारत का भाग्यविधाता बनने वाला है।” उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा राष्ट्र बनाना है, जो जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजित न हो, बल्कि एकजुट होकर श्रेष्ठता की दिशा में आगे बढ़े।सीएम योगी के मुताबिक, देश की विविधता उसकी विशेषता है, लेकिन सामाजिक एकता को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों से राष्ट्र की सामूहिक शक्ति प्रभावित होती है।

कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज की एकता को छिन्न-भिन्न करना राष्ट्रमाता और पूर्वजों के प्रति अपराध के समान है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की प्रगति के लिए सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव जरूरी है। अलग-अलग पृष्ठभूमि और भाषाओं के बावजूद लोगों को राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनसे युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना भी विकसित करें।उन्होंने कहा कि आज का युवा ही आने वाले समय में देश के विकास और दिशा निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसे में युवाओं को सकारात्मक सोच, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना से जोड़ना जरूरी है।

सीएम योगी के संबोधन का प्रमुख संदेश सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा देश बनाने की जरूरत है जहां विविधताओं के बावजूद समाज एकजुट रहे और सभी लोग राष्ट्र के विकास में अपनी भूमिका निभाएं।शिक्षक गरिमा कार्यशाला में दिए गए इस संदेश में शिक्षा को केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।