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ISI का नया हनीट्रैप प्लान बना चुनौती, AI से फर्जी फोटो-वीडियो के जरिए जासूसी का खतरा बढ़ा -

🕐 01 Sep 2026, 03:41 pm• 3 min padho • Chugal Khor News
ISI का नया हनीट्रैप प्लान बना चुनौती, AI से फर्जी फोटो-वीडियो के जरिए जासूसी का खतरा बढ़ा -

नई दिल्ली: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से जुड़े कथित हनीट्रैप नेटवर्क को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ती जा रही है। खुफिया इनपुट्स के मुताबिक, संवेदनशील जानकारियां हासिल करने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब इस नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार की गई फर्जी तस्वीरों और वीडियो के इस्तेमाल की आशंका ने चुनौती को और गंभीर बना दिया है।सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि डिजिटल पहचान के जरिए लोगों को भरोसे में लेकर उनसे संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों में आम नागरिकों के अलावा सरकारी और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है।

खुफिया अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, कथित तौर पर ISI अब अपने हनीट्रैप नेटवर्क को पाकिस्तान से संचालित करने के बजाय भारत के भीतर छोटे-छोटे मॉड्यूल के जरिए सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। एजेंसियों को आशंका है कि छोटे शहरों और कस्बों में ऐसे नेटवर्क तैयार किए जा सकते हैं, जहां गतिविधियों पर नजर अपेक्षाकृत कम रहती है।बताया जा रहा है कि पहले ऐसे कथित नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों से जुड़े होने की जांच हुई थी। अब दक्षिण भारत के छोटे शहरों में भी नेटवर्क विस्तार की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हनीट्रैप के पारंपरिक तरीकों में फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, तस्वीरों और व्यक्तिगत बातचीत का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन AI और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से ऐसे फर्जी प्रोफाइल को पहचानना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि AI-generated तस्वीरों और वीडियो के जरिए ऐसी डिजिटल पहचान तैयार की जा सकती है, जिसका वास्तविक दुनिया में कोई अस्तित्व ही न हो। इससे जांच एजेंसियों के लिए नेटवर्क के पीछे मौजूद वास्तविक व्यक्ति तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए सुरक्षा बलों के कर्मचारियों और युवाओं को निशाना बनाने की कोशिश की जा सकती है। सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती बढ़ाने, भावनात्मक संबंध बनाने या ब्लैकमेल जैसे तरीकों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की आशंका जताई गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य और सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर अनजान प्रोफाइल से आने वाले संदेशों, वीडियो कॉल और संदिग्ध लिंक को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।

सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, छोटे शहरों और कस्बों में आर्थिक लालच, नौकरी या व्यक्तिगत संबंधों के नाम पर लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की जा सकती है। यही वजह है कि खुफिया एजेंसियां अब केवल बड़े शहरों तक सीमित रहने के बजाय छोटे इलाकों में भी डिजिटल नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर बढ़ा रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान से जुड़े कथित डिजिटल जासूसी नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियां ज्यादा सतर्क हुई हैं। हालांकि, ऐसे अभियानों और उनके बाद कथित हनीट्रैप गतिविधियों से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में जरूरी है।कुल मिलाकर, ISI हनीट्रैप, AI डीपफेक, डिजिटल जासूसी और सोशल मीडिया फ्रॉड का संभावित गठजोड़ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले समय में AI से बनी नकली पहचान और वीडियो की पहचान करना साइबर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लिए अहम चुनौती होगी।

स्रोत: Filmitics

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