बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए. इस बैठक में उन सवालों पर काम करने की कोशिश दिखाई दी…

चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट आने के बाद शनिवार को केंद्रीय चुनाव आयोग की एक बैठक हुई जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए

इस बैठक में मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर कई अहम फैसले लिए गए

इस बैठक को लेकर चुनाव आयोग ने एक प्रेस बयान जारी किया है जिसमें बैठक में लिए गए अहम फ़ैसलों की जानकारी दी गई है

हालांकि कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि यह प्रेस नोट अहम सवालों के जवाब नहीं दे पाया

वहीं बीजेपी ने राहुल गांधी पर 'झूठ बोलने' का आरोप लगाया है. जबकि एनडीए के अहम साझेदार चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि 'चुनाव आयोग की ओर से सर्वसम्मति से जारी स्पष्टीकरण इस मामले से जुड़ी सभी ग़लतफ़हमियों को दूर करता है.'

चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने की अपनी मांग और तेज़ कर दी

कॉकरोच जनता पार्टी ने इसी शनिवार तक ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की थी और चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं होता है तो दो अक्तूबर से देशव्यापी धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा

शुक्रवार को कांग्रेस समेत कई दलों ने सीईसी के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में धरना प्रदर्शन किया

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अब शनिवार को हुई चुनाव आयोग की बैठक में कई फ़ैसले लिए गए हैं

बैठक की जानकारी देते हुए चुनाव आयोग के डायरेक्टर जनरल (मीडिया) आशीष गोयल ने कहा कि 26 सितंबर को दिन में तीन बजे दिल्ली के निर्वाचन सदन में भारत निर्वाचन आयोग की बैठक हुई

उन्होंने कहा, "आज की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी मौजूद थे. बैठक में आयोग ने सर्वसम्मति से कई फैसले लिए."

चुनाव आयोग के अहम फ़ैसले

चुनाव आयोग की बैठक में लिए गए फ़ैसलों में सबसे प्रमुख एसआईआर के मुद्दे को एड्रेस किया गया है. फ़ैसलों में कहा गया है-

जिन मतदाताओं को नामांकन में विसंगति या अन्य कारणों से नोटिस जारी किया गया है, उनके घर पर ही बीएलओ जाकर दस्तावेज़ इकट्ठा करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पोर्टल पर अपलोड करेंगे. ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर मतदाताओं को ईआरओ या एईआरओ कार्यालय में सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा

ज़िला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मज़दूरों, ग़रीबों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष शिविर और सहायता केंद्र स्थापित करें ताकि अधिक से अधिक पात्र मतदाताओं का नाम सूची में जोड़ा जा सके

एसआईआर के लिए फ़ॉर्म 6 के साथ अटैच्ड घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. ग़ैर एसआईआर अवधि के लिए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत फ़ॉर्म लागू होंगे

फ़ील्ड अधिकारियों को उनके क़ानूनी अधिकारों के मुताबिक़ ईसीआईनेट सिस्टम का इस्तेमाल करने की सुविधा दी गई है. वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति ईसीआईनेट की दोबारा जांच करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिस्टम अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों का पालन करता है. पिछले कुछ महीनों में राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई बदलाव किए जा चुके हैं. अब से आईटी मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी सभी नई पहलों पर आयोग की मंज़ूरी से पहले अधिकारियों की समिति में चर्चा की जाएगी

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 अक्तूबर 2026 कर दी गई है, जबकि इनके निस्तारण की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है. इसके अलावा, महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाख़िल करने की समयसीमा बढ़ाकर 12 अक्तूबर, 2026 कर दी गई है और नोटिस और दावों एवं आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा बढ़ाकर 10 नवंबर कर दी गई है

चुनाव आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है. जिन लोगों का नाम किसी कारणवश छूट गया है या जो पहली बार मतदाता बनने के पात्र हैं, वे संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पास आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए राज्यों में विशेष नामांकन अभियान भी चलाया जाएगा

आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले ही भेज दिया जाएगा और बैठक के मिनट्स जारी किए जाएंगे. सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट हर साल तय समयसीमा के भीतर, यानी 31 दिसंबर तक पूरी कर ली जाएगी

एसआईआर के फ़ैसलों पर क्या कहा गया

हाल के महीनों में आयोग ने देशभर में एसआईआर समेत कई फ़ैसले लिए हैं

24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का आदेश जारी किया गया था. इसकी शुरुआत बिहार से हुई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया शुरू की गई

यह आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंज़ूरी से जारी किया गया था

12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का कार्यक्रम 27 अगस्त 2025 को जारी किया गया था. वहीं, 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह कार्यक्रम 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत मंज़ूरी से जारी किया गया था

तीसरे चरण के बाकी 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की कुल संख्या का पता चल सकेगा

गोवा के सीईओ ने संबंधित बीएलओ को निर्देश दिया है कि वे उन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनसे फ़ॉर्म जमा करें, जिनके नाम मतदाता सूची से छूट गए हैं

सवालों का जवाब देने में नाकाम रहा आयोग- कांग्रेस

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग का प्रेस नोट सवालों का जवाब देने में नाकाम रहा

उन्होंने एक्स पर लिखा, "चुनाव आयोग का आज का प्रेस नोट बेहद कमज़ोर, अधूरा और बहुत देर से आया है. यह पुष्टि करता है कि 'इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर सही थी, लेकिन कई अहम सवालों के जवाब अब भी नहीं दिए गए हैं."

उन्होंने तीन मुद्दे गिनाए जिस पर उन्होंने स्पष्टता की मांग की

पवन खेड़ा ने आगे लिखा, "चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने फ़ॉर्म 6 में किए गए बदलावों का विरोध किया था. इनमें से एक ने इन बदलावों को 'अनधिकृत' और 'ग़ैरक़ानूनी' बताया था. अब चुनाव आयोग का कहना है कि पुराने फ़ॉर्म 6 का इस्तेमाल एसआईआर के बाहर, यानी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के दौरान किया जा सकेगा."

उन्होंने सवाल किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में उन युवा मतदाताओं का क्या होगा, जिन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया गया? इन दोनों राज्यों में एसआईआर के बाद चुनाव हुए, लेकिन बीच में एसएसआर नहीं हुआ

पवन खेड़ा ने यह भी पूछा, "पुराने फ़ॉर्म 6 की प्रासंगिकता क्या है, जब जनवरी 2024 के बाद से एसएसआर ही नहीं कराया गया है?"

ईसीआईनेट के बारे में उन्होंने कहा, पहले से बनी प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी (पीएससी) ने अब तक क्या काम किया है? अब उसी या इसी तरह की किसी समिति पर ईसीआईनेट की समीक्षा की ज़िम्मेदारी कैसे छोड़ी जा सकती है?"

पवन खेड़ा ने तीसरा मुद्दा गोवा के 97 मतदाताओं का उठाया है

उन्होंने लिखा, "चुनाव आयोग का कहना है कि गोवा में मतदाता सूची से बाहर किए गए 97 लोगों में से 81 ने अब फ़ॉर्म 6 भर दिया है. यह कार्रवाई 'इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर आने के बाद हुई है. लेकिन इससे असली सवालों के जवाब नहीं मिलते."

"इन 97 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए ही क्यों गए थे?"

बीजेपी ने क्या कहा

चुनाव आयोग के बयान जाने के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद रवि शंकर प्रसाद ने एक प्रेस कांफ़्रेंस कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया

उन्होंने कहा, "एक अख़बार की ख़बर के आधार पर विपक्षी दल, ख़ासकर कांग्रेस और राहुल गांधी, जिस तरह चुनाव आयोग पर बेबुनियाद और शर्मनाक आरोप लगा रहे हैं, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हम इसकी निंदा करते हैं."

"आज चुनाव आयोग ने एक विस्तृत प्रेस नोट जारी किया है. आज हुई बैठक में चुनाव आयोग के तीनों आयुक्त एक साथ मौजूद थे. यह बात भी इस ख़बर में शामिल है. प्रेस नोट में कहा गया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फ़ैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे."

रवि शंकर प्रसाद ने कहा, "चुनाव आयोग ने ख़ास तौर पर कहा है कि 27 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को उचित ठहराया था."

उन्होंने पूछा, "आख़िर एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट कौन गया था? कांग्रेस पार्टी गई थी, सीपीएम गई थी और टीएमसी ने दर्जनों मुक़दमे दायर किए थे. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार का पूरी तरह सफ़ाया हो गया. वहीं, केरल में कांग्रेस ने एसआईआर को सही ठहराया और कहा कि इसी की वजह से उसे जीत मिली."

उन्होंने राहुल गांधी से पूछा, "आपने झूठ क्यों बोला?"

एनडीए के प्रमुख घटक टीडीपी के नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एक्स पर लिखा कि "चुनाव आयोग की ओर से सर्वसम्मति से जारी स्पष्टीकरण हमारे संवैधानिक संस्थानों की विश्वसनीयता और साख को फिर से पुख़्ता करता है. यह इस मामले से जुड़ी सभी ग़लतफ़हमियों को दूर करता है."

"एसआईआर से जुड़े फ़ैसले सामूहिक रूप से और तय संस्थागत प्रक्रियाओं का सख़्ती से पालन करते हुए लिए जाते हैं."

नायडू ने कहा, "हमारे संवैधानिक संस्थानों का सम्मान सर्वोपरि है. भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की सामूहिक ज़िम्मेदारी है."

इक़बालिया बयान- योगेंद्र यादव

चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज़ पर राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने सवाल उठाए हैं

उन्होंने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, "यह तो गुनाह क़बूल करने जैसा है. यह कोई प्रेस विज्ञप्ति नहीं है. तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच हुआ यह संघर्षविराम समझौता एक इक़बालिया बयान है."

"आयोग ने अब अपनी ही मुहर के तहत अपने ख़िलाफ़ लगाए गए हर गंभीर आरोप की पुष्टि कर दी है. अब सिर्फ़ मुख्य चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि तीनों चुनाव आयुक्त बेनक़ाब हो गए हैं."

उन्होंने कहा, "इस्तीफ़ा देना ही सम्मानजनक विकल्प है. वरना उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए."