IGRS निस्तारण में लापरवाही पर DGP राजीव कृष्ण सख्त, 9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों पर कार्रवाई के निर्देश -

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में सितंबर महीने के दौरान शिकायतों में अत्यधिक वृद्धि वाले 9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इनमें लखनऊ के बाबू बनारसी दास (बीबीड़ी ) थाना प्रभारी भी शामिल हैं।डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जनशिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी फरियादी की शिकायत सुनने में लापरवाही, अभद्र व्यवहार या अनावश्यक टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों पर कार्रवाई
जनशिकायतों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान जिन थानों के प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए, उनकी सूची इस प्रकार है।
लखीमपुर खीरी: मैलानी और फरधानउन्नाव: सोहरामऊ एटा: जसरथपुरआगरा: लोहामंडीप्रतापगढ़: महेशगंजबदायूं: उसावाबिजनौर: चांदपुर मथुरा: जैतलखनऊ: बाबू बनारसी दास (बीबीड़ी)पुलिस महानिदेशक ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जारी आधिकारिक विवरण में इन थानाध्यक्षों को निलंबित किए जाने के बजाय प्रत्यावर्तित करने और विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है।
जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में डीजीपी ने सभी जोनल अपर पुलिस महानिदेशकों, पुलिस आयुक्तों, परिक्षेत्रीय अधिकारियों और जिलों के पुलिस प्रमुखों के साथ समीक्षा की।बैठक में निर्देश दिया गया कि आईजीआरएस, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री संदर्भ, पीजी पोर्टल और अन्य माध्यमों से मिलने वाली प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुना जाए। किसी भी शिकायत को दर्ज करने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। शिकायत के निस्तारण की समय-सीमा तय करने के साथ लंबित रहने का कारण भी दर्ज किया जाए और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराया जाए।
हर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक-पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बनेगी निगरानी डेस्क
शिकायतों के प्रभावी निस्तारण और लंबित मामलों पर नजर रखने के लिए प्रत्येक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में केंद्रीय निगरानी डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।यह डेस्क प्रतिदिन प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों का विवरण रखेगी। साथ ही संबंधित थानों और चौकियों से लंबित शिकायतों की स्थिति पर फॉलो-अप किया जाएगा, ताकि शिकायतकर्ताओं को बार-बार जिला मुख्यालय या पुलिस मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
थाने और चौकी पर ही सुनी जाए फरियाद
डीजीपी ने निर्देश दिया कि थाने और चौकी पर आने वाले प्रत्येक फरियादी की बात धैर्यपूर्वक और सम्मान के साथ सुनी जाए। शिकायतकर्ता के साथ अभद्रता, उपेक्षा, पक्षपात, भ्रष्टाचार या अनावश्यक टालमटोल की शिकायत मिलने पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी।लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता बनी रहे और कार्रवाई की वास्तविक स्थिति दर्ज की जाए।
हर थाने में चिह्नित होंगे 10 प्रमुख भूमि विवाद
भूमि विवादों को लेकर भी पुलिस महानिदेशक ने विशेष निर्देश दिए हैं। प्रत्येक थाने में क्षेत्र के शीर्ष 10 प्रचलित भूमि विवादों की सूची तैयार की जाएगी। इनके समाधान की निगरानी संबंधित ACP/CO करेंगे और राजस्व विभाग के अधिकारियों, विशेषकर SDM के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।सूची में शामिल विवादों का समाधान होने के बाद अगले 10 विवादों को सूची में शामिल कर कार्रवाई शुरू की जाएगी। अवैध कब्जे और कमजोर व्यक्तियों को जबरन बेदखल करने जैसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यक्ष बीट रिपोर्ट से भी होगी विवादों की पहचान
भूमि विवादों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए यक्ष बीट रिपोर्ट में दर्ज विवादों को भी संबंधित थानों की विवाद सूची में शामिल किया जाएगा। बीट स्तर पर मिली जानकारी का सत्यापन कर विवाद की गंभीरता का आकलन किया जाएगा और जरूरत के अनुसार संबंधित अधिकारियों को समय रहते कार्रवाई के लिए सूचित किया जाएगा।
संवेदनशील मामलों पर विशेष नजर, गठित होंगी टीमें
जिन विवादों में पहले मारपीट हो चुकी है, दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज हैं या जातिगत अथवा सांप्रदायिक तनाव की आशंका है, उन्हें प्राथमिकता पर रखा जाएगा। ऐसे मामलों की थाना, सर्किल और जनपद स्तर पर प्रतिदिन समीक्षा की जाएगी।विवादों के समाधान के लिए थाना, सर्किल और जिला स्तर पर विशेष टीमें गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। जहां शांति भंग होने की आशंका होगी, वहां संबंधित तथ्यों को सक्षम कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के प्रावधानों के तहत आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
तीन दिन में देनी होगी लंबित शिकायतों की रिपोर्ट
डीजीपी ने सभी जनपदीय पुलिस प्रभारियों को थाने और चौकी स्तर पर लंबित जनशिकायतों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारी शिकायतों के लंबित रहने के कारणों और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करेंगे।इस संबंध में तीन दिनों के भीतर कार्रवाई और अनुपालन की रिपोर्ट रेंज एवं जोन के माध्यम से पुलिस महानिदेशक को भेजनी होगी।
डीजीपी का स्पष्ट संदेश—फरियादियों को मिले न्याय
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों और विवादों का समाधान समयबद्ध, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से किया जाए। संभावित विवादों में समय रहते कार्रवाई कर कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।अब पुलिस के सामने चुनौती केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि फरियादी को थाने और चौकी स्तर पर ही न्यायोचित सहायता मिले और उसे अपनी समस्या लेकर बार-बार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
स्रोत: Filmitics
