लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार छात्र-छात्राओं और युवाओं से संवाद कर रहे हैं. वो सवाल कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को सुलझाने का वादा कर रहे हैं. प…

शनिवार की शाम हाफ़ बाजू की काली पोलो टी-शर्ट, ब्राउन शूज़ और ग्रे पैंट पहनकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल हुए

राहुल गांधी ने छात्र-छात्राओं का अभिवादन स्वीकार करने के तुरंत बाद कहा कि वो इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम कर चुके हैं

हर कार्यक्रम का एक विषय होता है और आज का विषय है, 'सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स'

राहुल गांधी ने जैसे ही यह कहा, वहां मौजूद छात्र-छात्राओं ने उनका अभिवादन किया. युवाओं का यह जोश भले ही राहुल गांधी और कांग्रेस को नई उम्मीद दिखा रहा हो, मगर उससे ठीक पहले दिल्ली छात्रसंघ (डीयू छात्रसंघ) चुनाव के नतीजे कहीं से भी कांग्रेस के लिए अच्छे नहीं थे

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद जीते, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय विजयी रहा और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ़ इंडिया (एनएसयूआई) को कोई पद नहीं मिला

लगातार युवाओं से संवाद कर रहे राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार छात्र-छात्राओं और युवाओं से संवाद कर रहे हैं. वो अपने चिरपरिचित अंदाज़ में टी-शर्ट और शर्ट पहनकर युवाओं के साथ मंच साझा कर रहे हैं. उनसे सवाल कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को सुलझाने का वादा कर रहे हैं. इस बीच वो केंद्र और राज्य सरकारों पर हमलावर होते हैं और कोचिंग फ़ीस, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति और शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हैं

अपने कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' में राहुल गांधी ने कहा कि कुछ ख़ास लोगों ने इस देश की संस्थाओं पर क़ब्ज़ा कर रखा है. सरकार नहीं चाहती कि सभी लोगों को इन संस्थाओं में भागीदारी का मौक़ा मिले

राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम छात्रों से इसलिए डरता है, क्योंकि छात्र सवाल पूछते हैं

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उन्होंने छात्र और 'अंधभक्त' की तुलना करते हुए कहा कि छात्र जिज्ञासु और निडर होता है, जबकि 'अंधभक्त' सवाल नहीं पूछता

उन्होंने कहा कि मौजूदा सिस्टम को छात्र नहीं, 'अंधभक्त' चाहिए

राहुल गांधी ने कहा कि छात्र पूछता है कि शिक्षण संस्थानों की स्थिति क्यों ख़राब हुई, बुनियादी ढांचा क्यों टूटा और प्रश्नपत्र क्यों लीक हो रहे हैं. उनकी इस बात पर युवाओं ने ताली बजाकर और शोर मचाकर उनका समर्थन भी किया

क्या राहुल गांधी युवाओं को अपनी तरफ़ जोड़ पा रहे हैं

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पर क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी ऐसा कर युवाओं को कांग्रेस से जोड़ पा रहे हैं, इसके जवाब में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "राहुल गांधी का युवाओं के सामने यह अच्छा प्रदर्शन है, मगर उन्हें जहां सीखने की ज़रूरत है, वहां वे नहीं सीख रहे हैं. एक तरफ़ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई हार जाती है और दूसरी तरफ़ युवाओं को पार्टी से जोड़ने की कोशिश हो रही है."

रशीद किदवई कहते हैं, "जेन ज़ी या युवा इस देश की राजनीतिक व्यवस्था के ख़िलाफ़ हैं, मगर उनके आकलन में कांग्रेस भी बहुत सारी चीज़ों में दोषी है. कर्नाटक और झारखंड में जो हो रहा है, उसमें भी इसी देश के युवा हैं."

हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित इसे दूसरी तरह समझाते हैं

उनका कहना है कि तमाम कोशिशों और रुकावटों के बाद भी इंदौर में राहुल का कार्यक्रम इतना सफल होना कांग्रेस और राहुल की सफलता है. राहुल ने जो रास्ता पकड़ा है, वो उन्हें युवाओं से जोड़ रहा है. वह अब स्टूडेंट्स के बीच जाकर बात कर रहे हैं और उनसे सीधे जुड़ रहे हैं. राहुल ने जेन ज़ी का जो मुद्दा पकड़ा है, वो बड़ा हो चुका है

अरुण दीक्षित के मुताबिक, जो युवा और छात्र देश में परेशान हैं, उन्हें लगता है कि राहुल गांधी उनकी बात कर रहे हैं. जिस जेन ज़ी को बीजेपी अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती थी, वो अपने आप चलकर राहुल का हथियार बन गया है

वहीं जेन ज़ी के वोट और एनएसयूआई की हार पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक्स पर पोस्ट किया, "जब एनएसयूआई का एक बाग़ी उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़कर डीयूएसयू चुनाव में रिकॉर्ड अंतर से जीतता है, तो निश्चित रूप से कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठने चाहिए."

"एबीवीपी कहीं ज़्यादा संगठित और संसाधनों से संपन्न दिखाई दी. चार में से तीन पद जीतकर वह साफ़ तौर पर पहले नंबर का छात्र संगठन रही. वोटों के बंटवारे का भी उसे कुछ फ़ायदा मिला

जेन ज़ी के वोट फिलहाल बंटे हुए हैं और उन्हें अपने पक्ष में करने की गुंजाइश अब भी बनी हुई है. कोई भी राजनीतिक दल इस वोट को अपना मानकर नहीं चल सकता."

युवाओं से जोशीला संवाद

इस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद युवाओं से काफ़ी सवाल पूछे. उनके इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं भी दिखाई दीं. इससे पहले 22 अगस्त को पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम विमेन स्पेशल एडिशन था, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं हिस्सा लेने आई थीं

वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित समझाते हैं, "आप राहुल में बदलाव देखिए. पूरे देश में मोदी की ड्रेस की हमेशा चर्चा रहती है, लेकिन अब राहुल ने जो अटायर चुना है, वो यूथ का अटायर है. इससे वो सीधे लोगों से जुड़ रहे हैं. राहुल ने अब जिस तरह से ख़ुद को ढाला है, वो युवाओं और महिलाओं से जुड़ने तथा उनके मुद्दे उठाने का सीधा प्रयास है."

इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "राहुल युवा नेताओं में से एक हैं. इसके बावजूद अभी यह कहना पूरी तरह उचित नहीं होगा कि महिलाओं और युवाओं में उनका बहुत अधिक क्रेज़ है. सिविल सोसायटी यानी आम लोग बहुत कम जगह सत्ता में आते हैं. पड़ोसी राज्य नेपाल में ऐसा हुआ, मगर वहां का हाल हम सबको पता है. भीड़ हमेशा आंदोलन और माहौल बनाती है, मगर उनका वोट में तब्दील होना अलग चीज़ है."

किदवई कहते हैं, "यह कहना सही नहीं होगा कि युवा वर्ग में राहुल को लेकर बहुत गर्मजोशी है. नहीं तो दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई का यह हाल नहीं होता."

"राहुल गांधी 2029 के लोकसभा चुनाव के लिहाज़ से जो कर रहे हैं, अभी वह पर्याप्त नहीं है. राहुल को राजनीतिक आचरण के तौर-तरीक़े सीखने होंगे. जनसमर्थन और उसका वोट में तब्दील होना अलग बात है."

कार्यक्रम के बाद बीजेपी ने क्या कहा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा, "राहुल गांधी ने अपनी हालिया 'छात्रों की गूंज' रैली से साबित कर दिया है कि वे सुधरने वाले नहीं हैं. वे कभी बाज़ नहीं आएंगे और मनगढ़ंत निराशा फैलाने की अपनी आदत भी कभी नहीं छोड़ेंगे

सिन्हा ने कहा, "आज दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने जिस ज़बरदस्त तरीक़े से जीत हासिल की है, उसने राहुल गांधी की 'झूठ की गूंज' की धज्जियां उड़ा दी हैं. अगर उनमें रत्ती भर भी आत्मसम्मान बचा होता तो आज वे या तो छात्रों से माफ़ी मांगते या यह स्वीकार करते कि उनकी 'छात्रों की गूंज' रैलियां पूरी तरह नाकाम रही हैं. लेकिन इसके बजाय वे लगातार और ज़हर उगल रहे हैं."

"मेरा मानना है कि राहुल गांधी को सकारात्मक बातें करनी चाहिए. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है. छात्रों को केवल शिकायतें करने वाले लोग नहीं चाहिए. छात्र नकारात्मकता फैलाने वाले लोगों को नहीं चाहते. उन्हें समाधान चाहिए."

"व्यवस्था में कुछ कमियां हो सकती हैं, लेकिन इस समय भी जिस एकमात्र नेता पर छात्रों को बिना किसी हिचक के भरोसा है, वह प्रधानमंत्री मोदी हैं."

कार्यक्रम स्थल को लेकर विवाद

राहुल गांधी का यह कार्यक्रम पहले 12 सितंबर को होना था. कार्यक्रम इंदौर के रीजनल पार्क के पास स्थित उस मैदान में आयोजित हुआ, जिसे कांग्रेस ने "भारत जोड़ो मैदान" नाम दिया है. पहले इसे जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कराने की योजना थी, लेकिन प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्टेडियम देने से इनकार किया. इसके बाद तारीख़ 12 सितंबर से बदलकर 19 सितंबर कर दी गई और स्थान रीजनल पार्क के पास की आईडीए की ज़मीन को बनाया गया

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी की क़रीब 12,000 वर्गमीटर ज़मीन के तीन दिन के इस्तेमाल के लिए ₹10.08 लाख जमा किए थे. आईडीए ने बाद में निर्धारित अवधि से पहले 4,800 वर्गमीटर ज़मीन के उपयोग के आरोप में ₹4,03,270 अतिरिक्त मांगे. कांग्रेस ने इसे राजनीतिक दबाव बताया, जबकि प्राधिकरण ने इसे किराये और नियमों का मामला कहा था

इस कार्यक्रम में दूसरा विवाद तब हुआ, जब राहुल गांधी की सिक्योरिटी को लेकर पुलिस की ओर से जारी सुरक्षा शर्तों के दस्तावेज़ में उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 में हुई हत्या के बाद गठित वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया. इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के कार्यक्रम में अड़ंगे डालने के लिए अपनी ताक़त का दुरुपयोग कर रही है

वहीं, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश सिंह यादव ने यह आरोप ख़ारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस इस कार्यक्रम में आने वाले लोगों की तादाद और अन्य बिंदुओं के बारे में पुलिस और प्रशासन को सही जानकारी नहीं दे रही

अब तक किन शहरों को कार्यक्रम के लिए चुना गया

कोटा: अभियान की शुरुआत यहीं से हुई. कोटा देश का प्रमुख प्रतियोगी परीक्षा और इंजीनियरिंग-मेडिकल कोचिंग केंद्र है. यहां परीक्षा का दबाव, महंगी कोचिंग, विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं. इस कार्यक्रम की शुरुआत 17 जून 2026 को कोटा से ही हुई थी

देहरादून: उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और भर्तियों में कथित अनियमितताएं बड़ा मुद्दा रही हैं. यहां 17 जुलाई 2026 को राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद किया था

प्रयागराज: यह उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है. यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी बड़ी संख्या में रहते हैं. परीक्षाओं, परिणामों और भर्ती में देरी को लेकर यहां पहले भी छात्र आंदोलन होते रहे हैं. यहां 8 अगस्त 2026 को 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम हुआ था

पुणे: पुणे में बड़ी संख्या में कॉलेज, विश्वविद्यालय और बाहर से आए विद्यार्थी हैं. लेकिन इस संस्करण की अलग पहचान यह थी कि इसे 'महिला स्पेशल महारैली' बनाया गया. इसका फ़ोकस छात्राओं की पहचान, स्वतंत्रता, शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसरों पर था

इंदौर: इंदौर मध्य प्रदेश का बड़ा शिक्षा और कोचिंग केंद्र है. राहुल गांधी ने इंदौर संस्करण को "सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स" विषय दिया