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हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन, जानें पूजा-व्रत के शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम धार्मिक -

🕐 13 Sep 2026, 06:51 pm• 2 min padho • Chugal Khor News
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन, जानें पूजा-व्रत के शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम धार्मिक -

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन, जानें पूजा-व्रत के शुभ मुहूर्त और जरूरी नियमधार्मिक

14 सितंबर 2026 को धार्मिक आस्था के लिहाज से बेहद खास संयोग बनने जा रहा है। इस दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ मनाई जाएगी।

दोनों पर्वों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हरतालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। वहीं, गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।एक ही दिन पड़ रहे दोनों पर्वपंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह समाप्त होगी। इसके बाद गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। ऐसे में इस बार दोनों पर्वों की तिथियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

श्रद्धालुओं के लिए यह संयोग धार्मिक रूप से विशेष माना जा रहा है।हरतालिका तीज पर पूजा का शुभ समयहरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए सुबह का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना जरूरी है।गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न पूजा का महत्वगणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है

श्रद्धालु विधि-विधान से गणपति की पूजा कर सुख-समृद्धि और विघ्नों के निवारण की प्रार्थना करते हैं। गणेश स्थापना और पूजा का सटीक समय स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।दोनों व्रत रखने वालों के लिए जरूरी नियमहरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन होने के कारण व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को पूजा के समय और व्रत की प्रक्रिया को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी। दोनों व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। निर्जला व्रत रखने में असुविधा होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। व्र

त, पूजा और पारण से जुड़े नियमों के लिए स्थानीय पंचांग और धार्मिक आचार्यों की सलाह ली जा सकती है।ध्यान दें: पूजा और व्रत के शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार ही पूजा का समय निर्धारित करना चाहिए।

स्रोत: Filmitics

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