नोएडा के मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के इस्तेमाल पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए आकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर दी है। अदालत ने मामले मे…

नोएडा के मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के इस्तेमाल पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए आकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर दी है। अदालत ने मामले में प्रशासन की कार्रवाई को कठघरे में खड़ा किया और 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया है।हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से पेश किए गए तथ्यों पर गंभीर टिप्पणी की।

अदालत के मुताबिक आकृति चौधरी के खिलाफ NSA के तहत हिरासत के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे। कोर्ट ने पूरी कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए इसे नागरिक स्वतंत्रता के लिहाज से गंभीर मामला माना।आकृति चौधरी को नोएडा में मजदूर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और करीब पांच महीने तक हिरासत में रखा गया। लेकिन अब हाईकोर्ट ने NSA के तहत की गई इस कार्रवाई को रद्द कर दिया है।कोर्ट ने सिर्फ हिरासत रद्द करने तक ही मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि गलत तरीके से हिरासत में रखने के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है।

इस मुआवजे की भरपाई अधिकारियों के वेतन से किए जाने का आदेश प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।हाईकोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किसी नागरिक की स्वतंत्रता को मनमाने तरीके से सीमित नहीं किया जा सकता। NSA जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल भी ठोस तथ्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।

नोएडा मजदूर आंदोलन से शुरू हुआ यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन की बहस का बड़ा उदाहरण बन गया है। अदालत का फैसला प्रशासन के लिए जवाबदेही का संदेश है और साथ ही यह सवाल भी छोड़ता है कि कठोर कानून लगाने से पहले क्या पर्याप्त सबूत और कानूनी आधार की पूरी पड़ताल की गई थी?