Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह जिले से एक बार फिर ऐसी हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, जो विकास के तमाम बड़े दावों को कटघरे में खड़ा करती है. देश में चांद और…

Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह जिले से एक बार फिर ऐसी हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, जो विकास के तमाम बड़े दावों को कटघरे में खड़ा करती है. देश में चांद और मंगल तक पहुंचने की बातें हो रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी गांव के बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए चारपाई यानी खाट का सहारा लेना पड़ रहा है

ताजा मामला गिरिडीह के बरमसिया इलाके का है, जहां एक बीमार शख्स की हालत अचानक बिगड़ गई. परिजनों ने तुरंत सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया. एंबुलेंस सेवा की गाड़ी आई भी, मगर गांव तक पहुंचने का रास्ता इतना बदहाल और कच्चा था कि वाहन गांव के भीतर कदम तक नहीं रख सका. इसके बाद शुरू हुआ लाचार ग्रामीणों का वह संघर्ष, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी को बयां करता है

गांव तक सड़क नहीं होने की वजह से जब एंबुलेंस बीच रास्ते में ही रुक गई, तो मरीज के परिजनों और ग्रामीणों के सामने समय पर अस्पताल पहुंचने की बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई. मरीज की हालत लगातार गिर रही थी और हर बीतता पल उसकी जिंदगी के लिए बेहद अहम था. ऐसी आपात स्थिति में गांव वालों ने बिना वक्त गंवाए एक खाट निकाली. उस पर बीमार व्यक्ति को लिटाया गया और चार युवकों ने खाट को अपने कंधों पर उठा लिया

इसके बाद ग्रामीण पथरीले और उबड़ खाबड़ रास्ते पर तेजी से दौड़ पड़े ताकि समय रहते पक्की सड़क तक पहुंचा जा सके. कई किलोमीटर का यह कठिन फासला तय करने के बाद मरीज को मुख्य मार्ग पर खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा सका. ग्रामीणों के चेहरे पर डर, बेबसी और गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आए दिन यह दावे किए जाते हैं कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं. दूरदराज के इलाकों में नई-नई सुविधाएं शुरू करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के बड़े-बड़े वादे मंचों से किए जाते हैं. लेकिन गिरिडीह की यह घटना साफ बताती है कि ये तमाम बातें सिर्फ भाषणों और सरकारी फाइलों तक ही सिमट कर रह गई हैं