अभिजीत दीपके मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहा विवाद अब विरोध प्रदर्शन की चेतावनी तक पहुंच गया है। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने…
अभिजीत दीपके मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहा विवाद अब विरोध प्रदर्शन की चेतावनी तक पहुंच गया है। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो संगठन देशभर में प्रदर्शन करेगा। दीपके के मुताबिक, इस अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर को मुंबई से की जाएगी और इसके बाद इसे देश के अन्य शहरों तक ले जाने की योजना है। दीपके ने गांधी जयंती का जिक्र करते हुए लोगों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए संकल्प लेने की अपील भी की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब CJP की ओर से ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया गया है।
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चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। इसी बीच सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। बताया गया है कि इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, फॉर्म-6 तथा वोटर डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। CJP ने इन्हीं घटनाओं का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने Election Commission Thik Karo’ नाम से देशव्यापी अभियान चलाने की बात भी कही है।
CJP की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है। संगठन SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच और मतदाता सूची में किए गए बदलावों से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की भी मांग कर रहा है। संगठन ने SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों को CJP के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसके अलावा संगठन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की है। CJP का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता होनी चाहिए।
वहीं, चुनाव आयोग ने चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद और आपत्तियों को लेकर अलग पक्ष रखा है। आयोग के अनुसार किसी मुद्दे पर अलग राय, सुझाव या लिखित टिप्पणी सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग का कहना है कि SIR समेत महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
अब सभी की नजर 48 घंटे की समय-सीमा खत्म होने के बाद CJP के अगले कदम पर है। अभिजीत दीपके के बयान के मुताबिक, अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन मुंबई से विरोध अभियान शुरू किया जाएगा। इसके बाद इस अभियान को देश के अन्य शहरों तक ले जाने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 2 अक्टूबर को संगठन की ओर से किस तरह की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं और इस मुद्दे पर आगे क्या राजनीतिक व सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आती है।





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