दक्षिण गुजरात के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर की कई पहलें सामने आई हैं. इन…
दक्षिण गुजरात के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर की कई पहलें सामने आई हैं. इन प्रयासों के केंद्र में पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी की वह सोच है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ही बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है
धरमपुर क्षेत्र में स्थापित श्रीमद राजचंद्र विद्यापीठ को 238 गांवों के लिए पहला साइंस कॉलेज बताया गया है. इसका उद्देश्य आदिवासी युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम करना है. कॉलेज में विज्ञान से जुड़े कई स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित होते हैं. इनमें B.Sc. के साथ केमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी में M.Sc. तथा मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी से जुड़े पाठ्यक्रम शामिल हैं
शिक्षा के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मिशन की गतिविधियां ग्रामीण आबादी तक पहुंच रही हैं. श्रीमद राजचंद्र हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 250 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी चैरिटेबल अस्पताल है, जहां ग्रामीण और जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. अस्पताल में कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ऑर्थोपेडिक्स और ऑन्कोलॉजी समेत कई विशेषज्ञ सेवाएं मौजूद हैं
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी बच्चों के लिए हार्ट सर्जरी और चिकित्सा सहायता भी इस सामाजिक पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों के इलाज तक पहुंच उपलब्ध कराना है
मिशन की पहल केवल स्कूल और कॉलेज तक सीमित नहीं है. महिलाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए श्रीमद राजचंद्र सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर विमेन के माध्यम से प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. ‘राज उपहार’ से जुड़े स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों को 26 देशों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी दी गई है
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए नए सैटेलाइट सेंटर भी स्थापित किए गए हैं. मिशन का आगामी श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल विश्वविद्यालय भी बहुविषयक उच्च शिक्षा और शोध के अवसरों को ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना का हिस्सा है. इस तरह दक्षिण गुजरात में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और ग्रामीण आजीविका को जोड़कर एक ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय स्तर पर ही लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें






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