Shashi-Ravi Ruia: अमेरिका में एक बड़े स्टील प्लांट को लेकर भारतीय कारोबारी समूह एस्सार एक बार फिर चर्चा में है. इस प्रोजेक्ट में करीब 18 अरब डॉलर के निवेश की ब…

Shashi-Ravi Ruia: अमेरिका में एक बड़े स्टील प्लांट को लेकर भारतीय कारोबारी समूह एस्सार एक बार फिर चर्चा में है. इस प्रोजेक्ट में करीब 18 अरब डॉलर के निवेश की बात सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट का जिक्र किया है. इसके साथ ही एक बार फिर लोगों की नजर एस्सार के पीछे मौजूद रुइया परिवार पर गई है

एस्सार की कहानी आज से करीब 57 साल पहले शुरू हुई थी. साल 1969 में दो भाइयों शशि रुइया और रवि रुइया ने मिलकर इस कंपनी की शुरुआत की थी. उस समय कंपनी को चेन्नई पोर्ट पर ब्रेकवाटर बनाने का करीब 2.5 करोड़ रुपये का ठेका मिला था. यहीं से शुरू हुआ कारोबार आगे चलकर स्टील, तेल, बिजली, बंदरगाह, टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों तक पहुंच गया

शशि रुइया का जन्म 1943 में हुआ था. उन्होंने 1965 में अपने पिता नंद किशोर रुइया के साथ पारिवारिक कारोबार में काम शुरू किया. बाद में उनके छोटे भाई रवि रुइया भी इस कारोबार से जुड़ गए. दोनों भाइयों ने 1969 में एस्सार की नींव रखी. कंपनी का नाम भी दोनों भाइयों के नाम के शुरुआती अक्षरों से बना. ‘S’ और ‘R’ को मिलाकर इसका नाम ‘Essar’ रखा गया. शुरुआत इंफ्रास्ट्रक्चर के काम से हुई, लेकिन भाइयों ने कारोबार को एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा

एस्सार ने 1976 में एक टैंकर खरीदकर शिपिंग कारोबार में कदम रखा. इसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे तेल, स्टील, पावर, पोर्ट और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया. भारत में आर्थिक उदारीकरण के दौर में निजी कंपनियों के लिए कई नए क्षेत्र खुले. एस्सार ने भी इस मौके का फायदा उठाया और अलग-अलग कारोबार में निवेश किया

गुजरात के हजीरा में कंपनी ने स्टील प्लांट बनाया. इसके अलावा वडीनार में रिफाइनरी, पोर्ट और पावर से जुड़ा कारोबार खड़ा किया. टेलीकॉम में कंपनी ने वोडाफोन एस्सार के जरिए कारोबार किया. बीपीओ क्षेत्र में एजिस जैसी कंपनी भी एस्सार समूह का हिस्सा रही

रुइया परिवार के कारोबार की एक खास बात यह रही कि एस्सार ने कई कंपनियों को लंबे समय तक अपने पास रखने के बजाय उन्हें खड़ा किया, बड़ा किया और बाद में बेच दिया. समूह के मुताबिक, टेलीकॉम, बीपीओ और तेल-गैस कारोबार की बिक्री से उसे 40 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम मिली

साल 2017 में एस्सार ने अपने तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा रूस की रोसनेफ्ट और ट्राफिगुरा-यूसीपी के कंसोर्टियम को करीब 12.9 अरब डॉलर में बेच दिया. इस सौदे में वडीनार रिफाइनरी, उससे जुड़ा पोर्ट और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ 3,500 से ज्यादा फ्यूल आउटलेट भी शामिल थे. इससे पहले 2011 में एस्सार ने वोडाफोन एस्सार में अपनी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 5.46 अरब डॉलर में बेच दी थी

एस्सार का विस्तार तेजी से हुआ, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर कर्ज भी लिया गया. स्टील, तेल, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के बाद कंपनी पर कर्ज का दबाव बढ़ गया. एस्सार स्टील बाद में भारत की दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई. 2018 में रुइया परिवार ने लेनदारों के दावों के निपटारे के लिए 54,389 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली. आखिरकार आर्सेलरमित्तल ने एस्सार स्टील के लिए बोली जीत ली

इसके बाद रुइया परिवार ने कई कारोबार और संपत्तियां बेचकर कर्ज कम करने पर ध्यान दिया. एस्सार के मुताबिक, 2019 तक समूह करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चुका चुका था

अमेरिका में एस्सार का नया स्टील प्रोजेक्ट अचानक शुरू हुई योजना नहीं है. कंपनी पहले से ही वहां लौह अयस्क के कारोबार में निवेश कर रही है. मिनेसोटा में एस्सार की मेसाबी मेटालिक्स परियोजना है. इसमें लौह अयस्क की खदान और पेलेट प्लांट शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, इस परियोजना में 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया जा चुका है

मेसाबी का लक्ष्य हर साल करीब 70 लाख टन डायरेक्ट-रिडक्शन ग्रेड लौह अयस्क पेलेट तैयार करना है. सितंबर 2026 में मिनेसोटा की मेसाबी खदान में ऑपरेशन शुरू होने की बात कही गई. एस्सार का कहना है कि यह अमेरिका में पांच दशक से ज्यादा समय में शुरू हुई पहली नई लौह अयस्क खदान है. अब कंपनी इसी सप्लाई चेन को आगे बढ़ाकर अमेरिका में स्टील उत्पादन से जोड़ना चाहती है

एस्सार समर्थित मेसाबी मेटालिक्स अमेरिका के आयोवा में एक बड़े स्टील प्लांट की योजना पर काम कर रही है. इस प्रोजेक्ट में पहले चरण में हर साल करीब 75 लाख टन स्टील बनाने की क्षमता प्रस्तावित है. आगे चलकर इसकी क्षमता और बढ़ाने की योजना बताई गई है

इसका खास पहलू यह है कि मिनेसोटा में एस्सार की लौह अयस्क परियोजना और आयोवा के प्रस्तावित स्टील प्लांट को एक ही कारोबारी श्रृंखला से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. यानी कंपनी का लक्ष्य अमेरिका में लौह अयस्क से लेकर पेलेट और फिर स्टील बनाने तक की पूरी प्रक्रिया को अपने नेटवर्क से जोड़ना है

रुइया परिवार की इस कारोबारी यात्रा में शशि और रवि दोनों भाइयों की बड़ी भूमिका रही. शशि रुइया का 25 नवंबर 2024 को 81 साल की उम्र में निधन हो गया. रवि रुइया एस्सार के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के विस्तार से जुड़े रहे हैं. समूह के मुताबिक, उन्होंने अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व में कंपनी के विस्तार और कई बड़े निवेश-विनिवेश की देखरेख की

अब परिवार की अगली पीढ़ी भी कारोबार में सक्रिय है. शशि रुइया के बेटे प्रशांत रुइया और रवि रुइया के बेटे रेवंत रुइया समूह से जुड़े हुए हैं. रेवंत रुइया मेसाबी मेटालिक्स के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन हैं. अमेरिकी स्टील निवेश की घोषणा के दौरान वह अपने पिता रवि रुइया के साथ नजर आए थे

रुइया परिवार की कारोबारी कहानी करीब पांच दशक में कई बड़े पड़ावों से गुजरी है. 1969 में चेन्नई पोर्ट के 2.5 करोड़ रुपये के ठेके से शुरू हुआ कारोबार स्टील, तेल, पावर, पोर्ट और टेलीकॉम तक पहुंचा. इसके बाद एस्सार ने कई बड़े कारोबार बेचे, अरबों डॉलर जुटाए और कर्ज कम किया. अब समूह अमेरिका में फिर से स्टील और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश कर रहा है.इस बार रुइया परिवार की योजना सिर्फ एक स्टील प्लांट लगाने तक सीमित नहीं दिखती. मिनेसोटा की लौह अयस्क परियोजना से लेकर पेलेट उत्पादन और आयोवा में प्रस्तावित स्टील प्लांट तक, एस्सार अमेरिका में एक पूरी स्टील सप्लाई चेन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है