Ujjain Shahi Masjid: महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. दरअसल, सड़क चौड़ी करने की एक योजना के तहत मस्जि…

Ujjain Shahi Masjid: महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. दरअसल, सड़क चौड़ी करने की एक योजना के तहत मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की तैयारी है, जिसके विरोध में लोग मस्जिद परिसर में जमा हो गए हैं. सोमवार को पुलिस और लोगों के बीच झड़प भी हुई, जिसने तनाव और बढ़ा दिया. लेकिन फिलहाल हालत प्रशासन के काबू में हैं. पुलिस ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है

जानकारी के अनुसार उज्जैन नगर निगम एक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करना चाहता है. ये सड़क शहर के विकास मास्टर प्लान 2035 का हिस्सा है. बता दें इस योजना के तहत करीब 730 मीटर लंबे मार्ग पर कुल 272 निर्माण चिह्नित किए गए हैं. इन्हीं में शाही मस्जिद का वह हिस्सा भी है जो प्रस्तावित सड़क की सीमा में आता है

BreakingVolunteers at Shahi Masjid in MP’s Ujjain have begun demolishing 3 feet of the mosque's hanging slab to avert bulldozer action as tensions flare up. For two nights, people had formed a night vigil to stop the demolition, with hundreds of people camping inside the mosque pic.twitter.com/4zcx0oXfdM

प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कवायद 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों से जुड़ी है. नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव के मुताबिक करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, इसलिए सड़कों का चौड़ा होना जरूरी हो गया है. कंठल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच के इस मार्ग को खासतौर पर अहम माना जा रहा है

नहीं. अदालती रिकॉर्ड के हिसाब से पूरी मस्जिद को गिराने का कोई आदेश नहीं है. कार्रवाई सिर्फ उस हिस्से पर प्रस्तावित है जो सड़क चौड़ीकरण की बीच में आ रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक ये हिस्सा करीब 10 फीट है. हालांकि मस्जिद प्रबंधन का दावा है कि इस कार्रवाई से नमाज के हॉल का हिस्सा करीब 120 फीट ऊंची मीनार और मजार चौक शाही प्रभावित हो सकते हैं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम के नोटिसों को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दीं और कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. मस्जिद प्रबंधन ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है. दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में उनकी अपील पर सुनवाई होनी है

सोमवार सुबह प्रस्तावित हिस्से को हटाने के दौरान पुलिस और कुछ लोगों के बीच झड़प हुई है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस दौरान भीड़ ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद से मस्जिद परिसर के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है

#WATCH | Madhya Pradesh: A large group of people clashes with Police in Ujjain at the spot where a portion of Shahi Masjid is planned to be demolished for a road-widening project. A heavy police force remains deployed in the area. pic.twitter.com/Yr2QXxxkXQ

यह सवाल विवाद का एक अहम हिस्सा बन गया है. दरअसल, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का दावा है कि मस्जिद 1390 में बनी थी. समुदाय के लोगों के मुताबिक मस्जिद करीब 636 साल पुरानी है. लेकिन कुछ रिपोर्टों ने इसे सिर्फ सौ साल से कुछ ज्यादा पुरानी भी बताया है. कई धरोहर सूचियों में इसके निर्माण का साल अज्ञात लिखा है और कुछ विशेषज्ञों ने पुरातात्विक सबूतों की कमी का हवाला देकर उम्र के दावे पर सवाल उठाए हैं

शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी के काफी करीब है. ये मंदिर के सामने वाले इलाके में स्थित है. यह उज्जैन का बेहद भीड़भाड़ वाला और धार्मिक रूप से अहम क्षेत्र है जहां आने वाले वर्षों में सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन के दौरान भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है

मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले भी सड़क चौड़ी करने के कई अभियानों में धार्मिक स्थलों को छुआ नहीं गया था. उनका यह भी आरोप है कि इससे पहले उज्जैन की तकिया मस्जिद के मामले में भी प्रशासन ने आश्वासन देने के बाद अचानक कार्रवाई कर दी थी. मस्जिद प्रबंधन के सदस्यों की यह भी आशंका है कि शहर को सिंहस्थ के लिए नया रूप देने की कोशिशों में पुरानी मस्जिदें खतरे में पड़ सकती हैं

Ujjain: Protests erupt as demolition work in part of Shahi Masjid campus continuesRead @ANI Story | #Protests #ShahiMasjid #Demolition pic.twitter.com/Nolxm9GMNE

कांग्रेस सांसद और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रशासन के रवैये को संवेदनहीन बताया है. उनका कहना है कि विकास के नाम पर एक सदियों पुरानी धरोहर को हटाना उचित नहीं है और सरकार को सड़क के दूसरी तरफ की जमीन लेने जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रशासन बार-बार मस्जिद की घेराबंदी करके क्या संदेश देना चाहता है

प्रशासन और उसके समर्थकों का तर्क है कि कार्रवाई सिर्फ सड़क चौड़ीकरण के लिए चिह्नित हिस्से तक सीमित है और इसे सुरक्षा और आवागमन की जरूरत के लिहाज से देखा जाना चाहिए. साथ ही अदालत ने भी फिलहाल इस पर रोक लगाने से मना किया है जिसे प्रशासन अपनी कार्रवाई के पक्ष में बड़ा आधार बता रहा है

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