UP Politics: देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में मतदान सबसे बड़ा अधिकार है, लेकिन जब इस अधिकार के इस्तेमाल पर ही संदेह के बादल मंडराने लगें तो सियासत का गरमाना तय ह…
UP Politics: देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में मतदान सबसे बड़ा अधिकार है, लेकिन जब इस अधिकार के इस्तेमाल पर ही संदेह के बादल मंडराने लगें तो सियासत का गरमाना तय है. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान को लेकर बड़ा बयान दिया
उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के भरोसे पर टिकी होती है. अगर किसी भी नागरिक के मन में यह हिचकिचाहट रह जाए कि उसका दिया गया वोट सही प्रत्याशी को मिला भी है या नहीं, तो यह पूरी व्यवस्था के लिए एक गंभीर स्थिति बन जाती है. उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया इतनी साफ और स्पष्ट होनी चाहिए कि समाज के हर तबके को उस पर अटूट विश्वास रहे
मायावती ने चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि भारत में आजादी के बाद दशकों तक मतपत्रों के जरिए चुनाव कराए जाते थे. उस दौर में वोटर अपने हाथ से मुहर लगाकर मतपेटी में पर्ची डालता था, जिससे उसे अपनी पसंद पर पूरा भरोसा रहता था. बाद में समय के साथ चुनाव आयोग ने आधुनिक तकनीक अपनाते हुए ईवीएम का चलन शुरू किया. बसपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी पहले दिन से ही मशीनी मतदान के तौर तरीकों पर ऐतराज जताती रही है. उनका मानना है कि आधुनिक बदलाव भले ही सुविधा लाते हों, लेकिन चुनावी व्यवस्था में सुविधा से कहीं ज्यादा महत्व निष्पक्षता और जनभावना के सम्मान का होता है
#WATCH | Lucknow, UP: BSP Chief Mayawati says, "The deteriorating law and order situation, frequently arising from various issues in the national capital, Delhi, as well as in the neighboring state of Punjab and other states, is a matter of grave concern for the country. To… pic.twitter.com/77vT4yTrx4
बसपा सुप्रीमो ने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां आज भी बहुत बड़ा तबका आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है. इनमें से कई मतदाता कम पढ़े लिखे या ग्रामीण अंचलों में रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि जब कोई गरीब, वंचित या मजदूर कतार में लगकर अपना वोट डालता है, तो उसके मन में रत्ती भर भी संशय नहीं रहना चाहिए. अगर ऐसे वर्ग चुनावी प्रक्रिया पर संदेह करने लगेंगे, तो उनका विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं से डगमगाने लगेगा. इसलिए चुनाव आयोग की यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक व्यवस्था की शुचिता का संदेश पूरी मजबूती से पहुंचाए
मतदान की पुष्टि के लिए जोड़ी गई वीवीपैट व्यवस्था को लेकर भी मायावती ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि वोट डालने के बाद निकलने वाली पर्ची को देखने भर से व्यवस्था पारदर्शी नहीं बन जाती. मौजूदा नियमों के तहत हर मतदान केंद्र पर सभी पर्चियों की गिनती नहीं की जाती, बल्कि कुछ चुनिंदा मशीनों का ही मिलान होता है. मायावती का कहना है कि जब तक हर बूथ पर मशीन में दर्ज कुल मतों और वीवीपैट से निकली पर्चियों का शत प्रतिशत मिलान नहीं होगा, तब तक आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हो सकतीं. मतदाता को इस बात की पूरी तसल्ली मिलनी चाहिए कि स्क्रीन पर दिखा निशान और बक्से में दर्ज हुआ फैसला एक ही है
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में तकनीकी छेड़छाड़ की संभावनाओं का जिक्र करते हुए बसपा अध्यक्ष ने कहा कि दुनिया भर में चुनावी सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ती रही है. हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई अलग से तकनीकी दस्तावेज या रिपोर्ट पेश नहीं की, लेकिन उनका कहना था कि जब बात करोड़ों लोगों के जनादेश की हो तो किसी भी सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने चुनाव आयोग और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे आगे आकर इन तमाम संशयों का स्थाई निवारण करें
मायावती ने अपने बयान का समापन करते हुए कहा कि चुनाव केवल सरकार बनाने या किसी पार्टी को जिताने हराने का माध्यम नहीं हैं. यह करोड़ों नागरिकों की उस आस्था का प्रतीक हैं, जो वे अपने देश की व्यवस्था पर जताते हैं. उन्होंने दोहराया कि बहुजन समाज पार्टी लगातार इन मुद्दों को इसलिए उठा रही है ताकि देश का लोकतंत्र और ज्यादा मजबूत बने. अगर चुनाव प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता के मानक और ऊंचे किए जाते हैं, तो इससे न केवल राजनीतिक दलों की आशंकाएं दूर होंगी बल्कि आम वोटर का मनोबल भी कई गुना बढ़ जाएगा






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