मोहेब्बी ने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी अपने मकसद में पूरी तरह विफल रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियो…

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मोहेब्बी ने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी अपने मकसद में पूरी तरह विफल रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों की युद्ध में हार हुई है। उनकी हार ऐतिहसिक और शर्मनाक है, लेकिन उनमें हार स्वीकार करने का साहस नहीं है

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ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर है। सीजफायर के बाद दोनों देशों के बीच MoU पर सहमति बनने के आसार नजर आ रहे थे। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार धमकियों के बाद भी ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें नहीं मानता, वो समझौता नहीं करेगा। अब एक बार फिर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने सोमवार को धमकी दी है

7 महीने बाद भी मिडिल ईस्ट में तनाव

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर सामूहिक हमले के बाद करीब 7 महीने हो चुके हैं लेकिन अब तक युद्ध का ज्वाला शांत होने का नाम नहीं ले रहा। पूरा मिडिल ईस्ट संघर्ष की चपेट में है और दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि कब औपचारिक रूप से युद्ध खत्म होने का ऐलान होगा। लेकिन इसके आसार नहीं दिख रहे। डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं हो रहा है

IRGC ने अमेरिका को दी धमकी

ईरान की सेना IRGC ने सोमवार को धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर मिडिल ईस्ट में हालात नहीं सुधरे तो वह लंब समय तक युद्ध के लिए तैयार है। एक न्यूज नेटवर्क से बात करते हुए IRGC के सेकंड ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि ईरान लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। यदि संघर्ष अगले चरण में जाता है तो वह दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देगा

हार स्वीकार करने का साहस नहीं- मोहेब्बी

मोहेब्बी ने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी अपने मकसद में पूरी तरह विफल रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों की युद्ध में हार हुई है। उनकी हार ऐतिहसिक और शर्मनाक है, लेकिन उनमें हार स्वीकार करने का साहस नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की हार को वहां के एक्सपर्ट्स भी मानते हैं

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने में भी पूरी तरह से विफल रहा है। इतनी बड़ी सेना होने और लगातार दावा करने के बाद भी अमेरिका होर्मुज पर कुछ नहीं कर सका, इससे से साबित होता है कि उसके पास होमुज पर कंट्रोल करने की क्षमता नहीं थी

ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद तनाव

बता दें कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया था। इस हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसके बाद ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था। फिर उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया था

ईरान के जवाबी कार्रवाई के बाद युद्ध का ज्वाला पूरे मिडिल ईस्ट में फैल गया। फिर इस इलाके में तनाव को कम करने के लिए 17 जून 2026 को अमेरिका ने ईरान के साथ एक 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन, जिसे MoU कहा गया था। लेकिन जुलाई में अमेरिका ने फिर हमला किया और होर्मुज पर नाकेबंदी कर दी। इसके बाद इस इलाके में फिर से तनाव चरम पर है