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ईपीएफ़ओ की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई, जानिए क्या बदलेगा?

🕐 16 Sep 2026, 07:30 pm• 4 min padho • Chugal Khor News
ईपीएफ़ओ की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई, जानिए क्या बदलेगा?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफ़ओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने को मंज़ूरी दे दी है

अब तक इसके लिए वेतन सीमा 15 हज़ार रुपये प्रति माह थी जिसे बढ़ाकर 25 हज़ार रुपये प्रति माह कर दिया गया है

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फ़ैसले की जानकारी दी और इस प्रस्ताव को श्रम और रोज़गार मंत्रालय की ओर से सरकार को दिया गया था

ईपीएफ़ओ के तहत मिलने वाले अनिवार्य कवरेज में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ़), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी मुफ़्त जीवन बीमा (ईडीएलआई) का लाभ मिलता है

अब तक ये तीनों लाभ केवल 15 हज़ार रुपये तक की सैलरी वालों को मिलते थे जिसे बढ़ाकर 25 हज़ार कर दिया गया है. यानी अब 25 हज़ार रुपये तक की सैलरी वालों को भी इसका लाभ मिलेगा

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्या फ़ैसला लिया है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई

इस बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफ़ओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है

इस फ़ैसले से कितने कर्मचारियों को फ़ायदा होने की उम्मीद है? सरकार का कहना है कि इस फ़ैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के ईपीएफ़ओ कवरेज के दायरे में आने की उम्मीद है

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साथ ही इससे कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा

ईपीएफ़ओ की वेतन सीमा पहले कब बदली थी

ईपीएफ़ओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक के दशक में नहीं बदली थी. सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था

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अब वेतन सीमा बढ़ाने की ज़रूरत क्यों पड़ी

सरकार के मुताबिक़, पिछले कुछ सालों में वेतन में लगातार बढ़ोतरी, आय में वृद्धि और औपचारिक रोज़गार के विस्तार को देखते हुए वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है

सरकार का कहना है कि कई राज्यों और व्यवसायों में न्यूनतम मज़दूरी भी मौजूदा सीमा के क़रीब पहुंच गई है

15,000 रुपये से ज़्यादा वेतन पाने वाले नए कर्मचारियों के लिए अभी क्या व्यवस्था थी

मौजूदा वक़्त में 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक वेतन पर रोज़गार में शामिल होने वाला नया कर्मचारी अपने आप ईपीएफ़ संरचना के तहत कवर नहीं होता था

ऐसे कर्मचारी अनिवार्य भविष्य निधि, पेंशन और संबंधित बीमा सुरक्षा से बाहर रहते थे

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25,000 रुपये की नई सीमा से क्या बदलेगा

15,000 रुपये से 25,000 रुपये के वेतन बैंड में कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा ढांचे के दायरे में आ जाएगा

ईपीएफ़ओ के तहत किन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलता है

मंज़ूरी के बाद प्रभावी योजना के प्रावधानों के अनुसार भविष्य निधि बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत पेंशन सुरक्षा और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) के तहत बीमा सुरक्षा तक पहुंच का विस्तार होगा

इस फ़ैसले का योगदान और पेंशन पर क्या असर होगा

केंद्र सरकार का कहना है कि इससे वैधानिक योगदान और पेंशन-योग्य वेतन के ढांचे को मौजूदा वेतन स्तरों के हिसाब से बेहतर ढंग से ढालने में भी मदद मिलेगी

सरकार के मुताबिक़, नई सीमा बढ़ते वेतन स्तर के अनुसार ईपीएफओ फ्रेमवर्क को अपडेट करेगी और वर्क फ़ोर्स के व्यापक वर्ग तक औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के फ़ायदे पहुंचाएगी

सरकार पर कितना अतिरिक्त ख़र्च आएगा

अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी के लिए मौजूदा प्रावधान लगभग 10,250 करोड़ रुपये है. इस नए परिवर्तन के बाद ये बढ़कर लगभग 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा

सरकार का कहना है कि पांच वर्षों में अनुमानित खर्च लगभग 56,696 करोड़ रुपये होगा

ईपीएफ़ओ दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में से एक चलाता है. इसके तहत एम्प्लॉइज़ प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ़), एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (ईपीएस) और एम्प्लॉइज़ डिपॉज़िट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (ईडीएलआई) को मैनेज किया जाता है

ईपीएफ़ओ के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, लगभग 7.68 लाख योगदान करने वाले संस्थानों में क़रीब 7.98 करोड़ सदस्य योगदान कर रहे हैं, जबकि ईपीएस लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन का लाभ देता है. ईडीएलआई, ईपीएफ़ मेंबरशिप से जुड़ी इंश्योरेंस सुरक्षा देता है

स्रोत: BBC News हिन्दी

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