ECI Controversy: चुनाव आयोग के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर मचे घमासान के बीच एक बेहद अहम जानकारी सामने आई है. दोनों…
ECI Controversy: चुनाव आयोग के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर मचे घमासान के बीच एक बेहद अहम जानकारी सामने आई है. दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजी गई क्लासिफाइड चिट्ठी को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही थीं, उन पर से अब पर्दा उठ गया है. सामने आई नई जानकारी के मुताबिक यह पूरी कवायद आयोग के किसी बड़े नीतिगत फैसले या मुख्य चुनाव आयुक्त से मतभेद के चलते नहीं हुई थी, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक वरिष्ठ सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर के कामकाज और अधिकारों में किए गए फेरबदल से जुड़ी हुई थी
दरअसल उनतीस जुलाई को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को यह चिट्ठी लिखी गई थी. सियासी गलियारों में यह चर्चा बहुत तेजी से फैल गई थी कि दोनों आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए कामकाज के एकतरफा बंटवारे के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है. ऐसा कहा जा रहा था कि इस बदलाव के जरिए आईटी डिवीजन पर उनके प्रशासनिक नियंत्रण और देखरेख को जानबूझकर सीमित करने का प्रयास हुआ था. हालांकि सच्चाई इससे काफी अलग बताई जा रही है
स्थापित नियमों के जानकारों का कहना है कि अगर यह शिकायत सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दर्ज करानी होती, तो प्रोटोकॉल के मुताबिक यह पत्र सीधे देश के राष्ट्रपति को भेजा जाता. चूंकि यह मामला प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यशैली और जिम्मेदारियों के पुनर्गठन से जुड़ा था, इसलिए इसे कैबिनेट सचिव के सामने रखा गया. इसके साथ ही आयोग ने यह भी साफ कर दिया कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी किए गए काम के नए आदेश को दोनों आयुक्तों के कहने के बाद तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया था और उसे कभी धरातल पर उतरने ही नहीं दिया गया
A meeting of the Election Commission of India was held today, 26 September 2026, at 3:00 PM at Nirvachan Sadan, New Delhi.Chief Election Commissioner Shri Gyanesh Kumar and Election Commissioners Dr. Sukhbir Singh Sandhu and Dr. Vivek Joshi were present in today’s meeting.… pic.twitter.com/WZoqEIXVJq
चुनाव आयोग के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर पिछले कुछ समय से डेटा सुरक्षा और सेंट्रलाइजेशन के सवाल उठाए जा रहे थे. आयोग ने इन सभी चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए एक बड़ा कदम उठाया है. आयोग ने सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अगुवाई में एक विशेष समीक्षा समिति का गठन किया है, जिसमें आईआईटी या ट्रिपल आईटी के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए जाएंगे
यह विशेष तकनीकी समिति पोर्टल की कार्यप्रणाली की गहन पड़ताल करेगी. इसका मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि पोर्टल पर मौजूद अधिकार और एक्सेस कंट्रोल पूरी तरह से चुनाव से जुड़े कानूनों और तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही काम करें. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बूथ लेवल ऑफिसर, ईआरओ और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के पास उनकी जिम्मेदारी के अनुसार ही सुरक्षित तरीके से आईडी और पासवर्ड आधारित एक्सेस मौजूद है. इसके अलावा यह कड़ा नियम भी तय किया गया है कि भविष्य में आईटी मॉड्यूल में किसी भी नए बदलाव को लागू करने से पहले अधिकारियों की समिति में विचार-विमर्श करना अनिवार्य होगा
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आते ही देश का सियासी तापमान काफी चढ़ गया है. विपक्षी दलों का गठबंधन इस पूरे मामले को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर हमलावर हो गया है. विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और पूरे मामले में देश की सबसे बड़ी अदालत के दखल की मांग कर रहा है. विपक्षी दल इस मुद्दे पर तीस सितंबर को राजधानी में एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें कानूनी नोटिस का प्रारूप तैयार करने की योजना बनाई जा रही है
दूसरी तरफ केंद्र की सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी ने खुद को चुनाव आयोग के इस आंतरिक प्रशासनिक विवाद से पूरी तरह अलग कर लिया है. इस पूरे हंगामे के बीच चुनाव आयोग ने भरोसा जताया है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में अलग-अलग विचारों पर बातचीत और मंथन होना एक बेहद स्वस्थ और स्वाभाविक प्रक्रिया है. आयोग ने दो टूक शब्दों में यह बात दोहराई है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण सहित आयोग के सभी अंतिम फैसले पूरी तरह से एकजुट होकर और सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं



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