Dussehra 2026: दशहरा का त्योहार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाता है. हर साल शारदीय नवरात्रि के समापन के दिन यानी दशमी पर इस त्योहार को मनाया…

Dussehra 2026: दशहरा का त्योहार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाता है. हर साल शारदीय नवरात्रि के समापन के दिन यानी दशमी पर इस त्योहार को मनाया जाता है. इस वर्ष लोगों के बीच काफी कंफ्यूजन है कि इस बार दशहरा की सही तारीख क्या है, आखिर 19 और 20 अक्टूबर में से किस दिन रावण दहन किया जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि इस त्योहार के दिन अधर्म पर धर्म की विजय होती है. इस साल दशहरा की सही तारीख जानने के लिए इस रिपोर्ट को पढ़ें

द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का प्रारंभ 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 पर हो रहा है. दशमी तिथि का समापन अगले दिन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा. दशहरे के दिन विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर को दोपहर 01:59 मिनट से लेकर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. इसलिए, 20 अक्टूबर को ही दशहरा है और इस दिन ही रावण दहन किया जाएगा

19 अक्टूबर को दशहरा नहीं मनाया जाएगा. इस दिन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रहेगी और श्रवण नक्षत्र 20 अक्टूबर शाम 6:02 बजे तक रहेगा

आश्विन मास में शुक्ल पक्ष के दौरान प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक नवरात्रि के व्रत रखे जाएंगे. इसके बाद दशमी तिथि पर विजयदशमी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने लंका पर विजय हासिल की थी. भगवान राम ने रावण का वध किया था, क्योंकि माता सीता को रावण ने कैद कर लिया था. इसके बाद मात सीता को मुक्त करवाया था. इसलिए, इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व मनाया जाता है

नवरात्रि के नौ दिनों में देशभर में कई स्थानों पर रामलीला का आयोजन होता है. इसके बाद विजयदशमी के दिन रावण दहन का आयोजन होता है. विजयादशमी के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले खुले मैदानों में लगाएं जाते हैं और उन्हें जलाया जाता है. रावण दहन के साथ-साथ मेलों का भी आयोजन होता है. दशहरे के दिन पर ही दुर्गा विसर्जन भी किया जाता है

दशहरा के दिन शस्त्र पूजन होता है. इसलिए, इस दिन शस्त्र और शमी पूजा करने की परंपरा होती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शस्त्र पूजा करने से साहस में वृद्धि होती है. कार्यों में सफलता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. शाम को रावण दहन के लिए मुहूर्त 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि त्रेतायुग में इसी दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्ति दिलाई थी

दशहरा के दिन शाम के समय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देते हैं. इसके अलावा, इस दिन शस्त्र और वाहन पूजन का विधान होता है. इस दिन लोग औजारों, शस्त्रों, वाहनो और बही-खातों का पूजन भी किया जाता है

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)