देश में नशे के कारोबार और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ केंद्र और राज्यों ने अगले तीन वर्षों के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया है. नई दिल्ली में आयोजित एंटी-ना…

देश में नशे के कारोबार और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ केंद्र और राज्यों ने अगले तीन वर्षों के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया है. नई दिल्ली में आयोजित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का 23 सितंबर को समापन हुआ. दो दिवसीय सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने Vision Document on Narcotics Control (2026-29) को लागू करने और ड्रग्स के खिलाफ अभियान को और तेज करने का संकल्प दोहराया

सम्मेलन का आयोजन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने “United Resolve, Shared Responsibility” यानी एकजुट संकल्प, साझा जिम्मेदारी थीम के तहत किया. सम्मेलन में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ANTF प्रमुखों के अलावा विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए

22 सितंबर को सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया था. उद्घाटन संबोधन में उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए 31 दिसंबर 2029 तक देश से ड्रग कारोबार को जड़ से खत्म करने के सामूहिक लक्ष्य की बात कही

अमित शाह ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को नशे से मुक्त करना जरूरी है. उन्होंने इस अभियान में केंद्र और राज्य सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों तथा अन्य संबंधित संस्थानों के सामूहिक प्रयास पर जोर दिया

सम्मेलन में ड्रग तस्करी से निपटने की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव पर जोर दिया गया. अब केवल ड्रग्स की बरामदगी और जब्ती तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उसे ध्वस्त करने की रणनीति अपनाने की बात कही गई

इसके लिए ड्रग नेटवर्क की खुफिया जानकारी जुटाने, वित्तीय लेन-देन की पड़ताल, अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान तथा ड्रग कारोबार के मुख्य संचालकों और किंगपिन तक पहुंचने पर जोर दिया गया

Vision Document के चार रणनीतिक स्तंभों के तहत लक्ष्य, जिम्मेदारियां, समयसीमा और निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा हुई. राज्यों में ANTF को मजबूत करने और NCORD तथा Joint Coordination Committee (JCC) की बैठकों को अधिक परिणामोन्मुख बनाने पर भी जोर दिया गया

समापन सत्र में NCB के महानिदेशक ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र की स्थानीय चुनौतियों और जरूरतों के आधार पर 2026 से 2029 तक का राज्य-विशिष्ट रोडमैप तैयार करें

इस रोडमैप को राष्ट्रीय Vision Document on Narcotics Control (2026-29) के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया. NCB ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग राज्यों में ड्रग तस्करी के तौर-तरीके और नेटवर्क अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर लक्षित रणनीति जरूरी है

सम्मेलन में ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभिन्न जांच और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर सूचना साझा करने और समन्वय को अहम बताया गया. NCB के DG ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय, अंतर-राज्यीय और राज्य के भीतर सक्रिय ड्रग नेटवर्क की पहचान और उन्हें खत्म करने के लिए एजेंसियों को आपस में अधिक मजबूती से जुड़ना होगा. इसके साथ ही INTERPOL और विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय, विदेशों में मौजूद भगोड़ों की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण तथा ड्रग तस्करी के वित्तीय नेटवर्क की जांच पर भी चर्चा हुई

सम्मेलन में ड्रग मामलों की जांच में तकनीक के अधिक इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों ने NIDAAN, e-Sakshya, e-Prison और CCTNS जैसे डिजिटल डेटाबेस के प्रभावी इस्तेमाल पर चर्चा की. इसके अलावा Nar-K9 के जरिए खुफिया आधारित ड्रग इंटरसेप्शन, सिंथेटिक ड्रग्स के उन्नत विश्लेषण और MAC प्लेटफॉर्म के बेहतर इस्तेमाल पर भी विचार किया गया

सम्मेलन में सिंथेटिक ड्रग्स, उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल और देश में सक्रिय हो सकने वाली clandestine laboratories यानी गुप्त ड्रग लैब से पैदा हो रहे खतरे पर विशेष चर्चा हुई. रासायनिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल को ड्रग निर्माण के लिए अवैध तरीके से डायवर्ट किए जाने से रोकने के लिए Voluntary Code of Conduct (VCC) और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए red-flag indicators पर भी राज्यों को जानकारी दी गई

ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में केवल प्रवर्तन कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशे की मांग को कम करने और पुनर्वास पर भी जोर दिया गया

सम्मेलन में उच्च शिक्षण संस्थानों को ड्रग्स से मुक्त रखने के लिए UGC के “Nasha Mukt Campus Framework” की जानकारी दी गई. इसके अलावा शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर के Drug-Free Zone लागू करने, Nasha Mukt Bharat Abhiyan का विस्तार करने और नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई

सम्मेलन में ड्रग तस्करी के बदलते तौर-तरीकों पर भी चर्चा हुई. विशेष रूप से डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले नार्को अपराधों की जांच के लिए उपलब्ध तकनीकी और जांच उपकरणों पर अधिकारियों ने विचार साझा किए. इससे साफ है कि ड्रग नेटवर्क अब केवल पारंपरिक तस्करी मार्गों तक सीमित नहीं हैं और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को भी जांच एजेंसियों की रणनीति में शामिल किया जा रहा है

अवैध मादक पदार्थों की खेती को खत्म करने के लिए राज्यों द्वारा अपनाई जा रही अच्छी प्रक्रियाओं पर भी सम्मेलन में चर्चा हुई. इसके साथ ही अवैध खेती वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी जोर दिया गया

रेलवे के जरिए होने वाली ड्रग तस्करी से जुड़े सवाल पर NCB के DG ने बताया कि रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने पहले ही एक नारकोटिक्स सेल गठित किया है. NCB और RPF के बीच एक प्रस्तावित MoU पर भी काम किया जा रहा है. इसका उद्देश्य दोनों एजेंसियों के बीच क्षमता निर्माण, सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त अभियानों को संस्थागत रूप देना है

सम्मेलन के समापन पर NCB ने राज्यों और अन्य संबंधित एजेंसियों से ड्रग्स के खिलाफ अगले तीन वर्षों में पूरी प्रतिबद्धता और समन्वित प्रयास के साथ काम करने का आह्वान किया. अब रणनीति का फोकस केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ड्रग नेटवर्क की पहचान, उसके वित्तीय स्रोतों की जांच, किंगपिन तक पहुंच, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को तोड़ने और पूरे संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करने पर रहेगा. केंद्र और राज्यों के सामने अब लक्ष्य स्पष्ट है-ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को अधिक नेटवर्क-केंद्रित, खुफिया-आधारित और तकनीक-सक्षम बनाना तथा 2029 तक देश को नशे के कारोबार से मुक्त करने की दिशा में निर्णायक प्रगति करना