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दिल को रखना है मजबूत तो अपनाएं ये योगासन

🕐 21 Sep 2026, 10:42 am• 3 min padho • Chugal Khor News
दिल को रखना है मजबूत तो अपनाएं ये योगासन

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान और तनाव के कारण हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अपनी दिनचर्या में सुधार लाना बेहद जरूरी है, जिनमें योगासन बेहद जरूरी होता है। योग एक ऐसी प्राचीन पद्धति है जो न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि दिल को भी मजबूत बनाती है। नियमित योगासन करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, तनाव कम होता है और हृदय स्वस्थ रहता है

ताड़ासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन, गोमुखासन, अधोमुख श्वानासन, भुजंगासन, विपरीतकरणी आसन, मत्स्यासन, नाड़ीशोधन प्राणायम जैसे योगासन करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है

ताड़ासन: सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर की ओर खींचने वाला योगासन है, जो शरीर का संतुलन सुधारता है और रक्त संचार को बेदतर करने में मदद करता है, जिससे हृदय और मांसपेशियों को सही पोषण मिलता है और मांसपेशियों को सही पोषण मिलता है

अर्धचक्रासन: अर्धचक्रासन छाती और फेफड़ों को फैलाकर हृदय क्षेत्र को खोलता है, जिससे रक्त संचार और ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होता है। गहरी सांस लेने की प्रक्रिया से तंत्रिका तंत्र शांत होता है, जिससे दिल पर मानसिक तनाव का असर कम होता है

त्रिकोणासन: नियमित अभ्यास से हृदय प्रणाली सक्रिय होती है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। लंबी और गहरी सांसों के साथ इसे करने से मानसिक तनाव और चिंता कम होती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से हृदय को स्वस्थ रखता है

वीरभद्रासन: यह आसन शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ाता है। यह दिल तक ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और नसों में ब्लॉकेज की संभावना को कम करता है। इसके नियमित अभ्यास से छाती, कंधे और जांघों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है

गोमुखासन: यह आसन छाती की मांसपेशियों को खींचता और फैलाता है, जिससे हृदय क्षेत्र में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। बेहतर मेटाबॉलिज्म और रक्त प्रवाह के कारण यह शरीर में वसा और कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकने में मददगार साबित हो सकता है

अधोमुख श्वानासन: इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर के सभी अंगों में रक्त संचार बेहतर होता है। इसे करने से खासतौर पर सिर की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे दिमाग को आराम मिलता है और मानसिक शांति महसूस होती है। जब मानसिक तनाव कम होता है, तो नींद अपने आप अच्छी आने लगती है

भुजंगासन: गहरी सांस लेने की प्रक्रिया से पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे तनाव और कोर्टिसोल का स्तर कम होता है और दिल को सुकून मिलता है। यह आसन छाती (चेस्ट) और फेफड़ों के हिस्से को चौड़ा करता है, जिससे हृदय और फेफड़ों तक ऑक्सीजन का प्रवाह सुधरता है

विपरीतकरणी: यह आसन गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करता है, जिससे पैरों और निचले शरीर से रक्त का प्रवाह वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर सुचारू रूप से बढ़ता है। यह हाइपोएक्टिव थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को प्रबंधित करने में सहायक है

मत्स्यासन: इस आसन में पीठ को ऊपर उठाने से छाती फैलती है, जिससे दिल और फेफड़ों पर दबाव कम होता है और उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन से हृदय तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही मात्रा में पहुंचते हैं, जिससे दिल स्वस्थ रहता है

नाड़ीशोधन प्राणायम: धीमी गति से सांस लेने और छोड़ने से रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है, जिससे उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। यह प्राणायाम पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे हृदय की गति सामान्य और शांत होती है

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी

स्रोत: NewsNationTV

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