उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव में करीब छह महीने का समय बाकी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी…
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव में करीब छह महीने का समय बाकी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने संगठन को चुनावी मोड में लाना शुरू कर दिया है। सोमवार को राजधानी लखनऊ में तीनों प्रमुख दलों की अलग-अलग अहम बैठकें हुईं, जिनमें संगठन मजबूत करने से लेकर बूथ स्तर की तैयारियों और जनता के बीच पहुंच बढ़ाने तक की रणनीति पर चर्चा हुई।
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बीजेपी की प्रदेश स्तरीय ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें करीब 700 पार्टी पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यशाला में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और आगामी राजनीतिक अभियानों की रणनीति पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रस्तावित ‘सेवा संकल्प अभियान’ को घर-घर तक पहुंचाने की रणनीति पर भी मंथन किया गया।
समाजवादी पार्टी ने भी लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में अहम बैठक की। इसमें सभी जिला और महानगर अध्यक्षों के साथ विधानसभा स्तर पर मतदाता सूची से जुड़े कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया। बैठक में मतदाता सूची की समीक्षा, नए मतदाताओं को जोड़ने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई। अखिलेश यादव के निर्देशन में हुई बैठक में 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी के वोटर नेटवर्क को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
बहुजन समाज पार्टी ने भी लखनऊ में प्रदेश के सभी 75 जिलाध्यक्षों के साथ बैठक की। बैठक में संगठन के विस्तार, पार्टी की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और जनाधार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा संभावित प्रत्याशियों, बूथ स्तर की तैयारियों और संगठन को सक्रिय करने को लेकर भी जिलाध्यक्षों से फीडबैक लिया गया। बसपा प्रमुख मायावती ने इस दौरान महिलाओं के लिए सरकारों की ओर से घोषित की जा रही आर्थिक सहायता योजनाओं को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय महिलाओं को आर्थिक योजनाओं का लाभ देने की घोषणाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। मायावती ने ऐसी घोषणाओं को ‘रेवड़ी’ बताते हुए कहा कि बाद में लोगों को निराशा हाथ लगती है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीने दूर हों, लेकिन तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों की सोमवार को हुई बैठकों से साफ है कि चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। बीजेपी जहां सरकार की उपलब्धियों और संगठन के विस्तार को लेकर रणनीति बना रही है, वहीं सपा का फोकस मतदाता सूची और बूथ नेटवर्क मजबूत करने पर है। दूसरी ओर, बसपा संगठन के विस्तार और अपने जनाधार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यूपी की सियासत में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।





