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3 Charkhari Election 2027: बुंदेलखंड की चरखारी विधानसभा सीट 2027 के चुनाव से पहले इसलिए चर्चा में है क्योंकि यहां पिछले दो चुनावों के आंकड़े एक-दूसरे से अलग तस्वीर दिखाते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के बृजभूषण राजपूत ने समाजवादी पार्टी के रामजीवन को 41,881 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चरखारी विधानसभा सेगमेंट में समाजवादी पार्टी के अजेंद्र सिंह लोधी को 92,438 वोट, जबकि भाजपा के पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को 90,593 वोट मिले। यानी इस बार सपा को 1,845 वोटों की बढ़त मिली।
यही अंतर 2027 की चुनावी चर्चा का एक प्रमुख आधार बन गया है। हालांकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव अलग-अलग होते हैं, इसलिए 2024 के लोकसभा नतीजे को सीधे 2027 के विधानसभा परिणाम का संकेत नहीं माना जा सकता।
चरखारी विधानसभा सीट नंबर 231 है और यह महोबा जिले की सामान्य सीट है। 2012 में भाजपा की उमा भारती ने समाजवादी पार्टी के कप्तान सिंह को 25,265 वोटों से हराया था। उमा भारती को 66,888 और कप्तान सिंह को 41,623 वोट मिले थे। BSP के चौधरी धूराम को भी 41,358 वोट मिले थे।
2017 में भाजपा ने बृजभूषण राजपूत को मैदान में उतारा। उन्हें 98,360 वोट मिले, जबकि सपा की उर्मिला देवी को 54,346 वोट मिले। भाजपा की जीत का अंतर 44,014 वोट रहा। BSP के जितेंद्र कुमार मिश्रा 47,408 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 में भी चरखारी में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बृजभूषण राजपूत को 1,02,051 वोट मिले, जबकि सपा के रामजीवन को 60,170 वोट मिले। BSP के विनोद कुमार 41,087 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।इस तरह भाजपा ने सपा को 41,881 वोटों से हराया।यानी 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 40 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
अब 2024 के लोकसभा चुनाव के चरखारी विधानसभा सेगमेंट को देखें तो तस्वीर अलग नजर आती है। यहां सपा के अजेंद्र सिंह लोधी को 92,438 वोट मिले, जबकि भाजपा के पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को 90,593 वोट मिले। BSP के निर्दोष कुमार दीक्षित को 21,962 वोट मिले।इस आंकड़े के आधार पर 2024 में चरखारी विधानसभा क्षेत्र में सपा और भाजपा के बीच अंतर सिर्फ 1,845 वोट रहा।यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में दोनों दलों के बीच विधानसभा चुनाव में 41,881 वोटों का अंतर था। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार, मुद्दे, गठबंधन और मतदान का पैटर्न अलग हो सकता है।
चरखारी में 2027 की चुनावी चर्चा में सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण रहेंगे। स्थानीय चुनावी विश्लेषणों में लोधी समाज के साथ दलित, कुशवाहा-मौर्य, ब्राह्मण, साहू, यादव और मुस्लिम मतदाताओं को अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों के रूप में चर्चा में रखा जाता है।
हालांकि इन समुदायों के सटीक विधानसभा-स्तरीय वोट प्रतिशत के आधिकारिक जातिवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए किसी भी जातीय प्रतिशत को निश्चित मतदाता आंकड़े के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
2022 में BSP को चरखारी में 41,087 वोट मिले थे। यह संख्या भाजपा और सपा के बीच जीत के अंतर के लगभग बराबर थी। 2017 में भी BSP के खाते में 47,408 वोट आए थे।ऐसे में 2027 में BSP का प्रदर्शन और उसका वोट शेयर भाजपा तथा सपा के बीच मुकाबले के गणित को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव उम्मीदवारों, गठबंधन और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
चरखारी के चुनावी विमर्श में सामाजिक समीकरणों के साथ स्थानीय मुद्दों की भी भूमिका हो सकती है। रोजगार, पलायन, पानी, सिंचाई, खेती, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे बुंदेलखंड की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।2027 में राजनीतिक दल इन मुद्दों को किस तरह उठाते हैं और मतदाता उन्हें किस तरह देखते हैं, यह चुनावी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
चरखारी का चुनावी रिकॉर्ड एक दिलचस्प विरोधाभास सामने रखता है—2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की 41,881 वोटों की जीत और 2024 के लोकसभा चुनाव में चरखारी से सपा की 1,845 वोटों की बढ़त।लेकिन इन दोनों आंकड़ों के बीच अंतर को सीधे भविष्य के विधानसभा परिणाम से जोड़ना उचित नहीं होगा। 2027 में उम्मीदवार, संगठन, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे, सामाजिक समीकरण और मतदान का पैटर्न तस्वीर को प्रभावित करेंगे।इसलिए चरखारी में असली सवाल यही रहेगा कि 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान दिखाई दिया करीबी मुकाबला क्या विधानसभा चुनाव में भी कायम रहता है, या 2022 जैसा बड़ा अंतर फिर देखने को मिलता है?
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
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