बुजुर्गों के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान! शहरों में सस्ते किराए पर मिलेंगे मकान, जल्द तय होगी पूरी रूपरेखा -

अपना घर होना हर किसी का सपना होता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ आमदनी के साधन सीमित हो जाएं और शहरी इलाकों में किराए का खर्च लगातार बढ़ता जाए, तो रहने की व्यवस्था बुजुर्गों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी परेशानी को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब बुजुर्गों के लिए किफायती किराए के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को महंगे किराए के बोझ से राहत दिलाना है।
उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुजुर्गों के लिए कम किराए पर आवास उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू किया गया है। इस संबंध में विशेष सचिव आवास राजेश राय की ओर से आदेश जारी किया गया है। योजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के लिए सचिव आवास की अध्यक्षता में एक टीम भी गठित की गई है।इस टीम में लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर और वाराणसी के विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष शामिल हैं। अब यह टीम इस पूरी योजना के अलग-अलग पहलुओं पर विचार करेगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि किन शहरों और क्षेत्रों में बुजुर्गों के लिए ऐसे आवास विकसित किए जा सकते हैं और उन्हें किस तरह किफायती किराए पर उपलब्ध कराया जा सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस योजना की पात्रता, आय सीमा, मकानों का आकार, किराए की दर और आवेदन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि योजना का लाभ लेने के लिए किन शर्तों को पूरा करना होगा।हालांकि, योजना का फोकस शहरी क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे बुजुर्गों को राहत देने पर है, जिनके लिए बढ़ता किराया आर्थिक दबाव का कारण बन रहा है। आने वाले समय में गठित टीम की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर योजना की तस्वीर और साफ हो सकती है।
लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों के विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों को टीम में शामिल किया जाना इस योजना की अहम कड़ी माना जा रहा है। इन शहरों में जमीन, उपलब्ध आवासीय परियोजनाओं और बुजुर्गों के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सकता है।अगर सरकार की यह योजना धरातल पर उतरती है, तो शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए यह एक महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकती है। खासकर उन लोगों के लिए, जिनके पास खुद का मकान नहीं है और बढ़ती उम्र में किराए का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।फिलहाल पूरी योजना को लेकर कई सवालों के जवाब आने बाकी हैं। किराया कितना होगा, कितने मकान बनाए जाएंगे, किन बुजुर्गों को प्राथमिकता मिलेगी और आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी—इन सभी बिंदुओं पर आगे फैसला होना है। ऐसे में अब सबकी नजर गठित टीम की रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर है।
स्रोत: Filmitics
