बृजभूषण शरण सिंह के सरकारी बंगले में दाऊद के शार्पशूटर? पूर्व IPS के दावे से यूपी की सियासत में मचा घमासान -

उत्तर प्रदेश की सियासत में बृजभूषण शरण सिंह का नाम आते ही शक्ति प्रदर्शन, समर्थकों की भारी भीड़ और अवध की राजनीति में उनके प्रभाव की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अब उनके राजनीतिक अतीत से जुड़ा एक पुराना और बेहद गंभीर मामला फिर सुर्खियों में है। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे के एक पॉडकास्ट में किए गए दावे ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
राजेश पांडे के मुताबिक, 1990 के दशक में मुंबई के चर्चित जेजे अस्पताल शूटआउट के दौरान दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़े कुछ कथित शार्पशूटर दिल्ली में बृजभूषण शरण सिंह के सरकारी आवास में छिपे हुए थे। पूर्व आईपीएस के इस दावे के सामने आने के बाद यूपी की राजनीति में बृजभूषण के पुराने आपराधिक मामलों और उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, इस दावे को मौजूदा समय में एक पूर्व पुलिस अधिकारी के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। बृजभूषण शरण सिंह इन पुराने आरोपों में अदालत से बरी हो चुके हैं और उन्हें दोषी ठहराने वाला कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष मौजूद नहीं है।
बृजभूषण शरण सिंह के राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर से ही उनका नाम कई विवादों से जुड़ता रहा है। 1990 के दशक में उन पर अंडरवर्ल्ड से कथित संबंध और शूटरों को पनाह देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन्हीं आरोपों के संदर्भ में उनके खिलाफ TADA यानी Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की बात सामने आती है।
हालांकि, बाद में अदालत में पर्याप्त सबूत नहीं होने के चलते उन्हें इन मामलों में राहत मिली और वे बरी हो गए। यही वजह है कि मौजूदा राजनीतिक बहस में पुराने आरोपों के साथ उनके खिलाफ आए न्यायिक फैसले का जिक्र भी बेहद महत्वपूर्ण है।
अब सवाल यह है कि इतने साल पुराने मामले की चर्चा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्यों तेज हो रही है?बृजभूषण शरण सिंह आज भी पूर्वी उत्तर प्रदेश और अवध के कई इलाकों में प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा माने जाते हैं। वह छह बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। उनके परिवार की भी राजनीति में मजबूत मौजूदगी है। उनके एक बेटे सांसद और दूसरे बेटे विधायक हैं।हाल ही में उनके समर्थन में अयोध्या से लखनऊ तक दिखाई दिया शक्ति प्रदर्शन भी उनके राजनीतिक प्रभाव की चर्चा का विषय बना था। ऐसे में पूर्व IPS राजेश पांडे का पुराना घटनाक्रम सामने लाना विपक्ष के लिए राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन सकता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे करीब आएगा, नेताओं के पुराने रिकॉर्ड, राजनीतिक विवाद और कानूनी मामले चुनावी बहस का हिस्सा बनना तय माना जा रहा है। बृजभूषण शरण सिंह को लेकर भी विपक्ष बीजेपी पर सवाल उठा सकता है।हालांकि, किसी भी पुराने आरोप को चुनावी मुद्दा बनाने से पहले उसके कानूनी रिकॉर्ड और अदालत के फैसले को ध्यान में रखना जरूरी होगा। बृजभूषण इन पुराने मामलों में अदालत से बरी हो चुके हैं।
अब नजर इस बात पर होगी कि पूर्व IPS राजेश पांडे के दावे पर बृजभूषण शरण सिंह क्या प्रतिक्रिया देते हैं? क्या वह इस बयान को सिरे से खारिज करेंगे या पुराने मामले को लेकर कोई नया राजनीतिक पलटवार करेंगे?
2027 की सियासी जंग से पहले यूपी में मुद्दे लगातार गर्म हो रहे हैं। ऐसे में बृजभूषण से जुड़ा यह विवाद सिर्फ एक पुराने मामले की चर्चा नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव में अवध और पूर्वांचल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप की नई लड़ाई का संकेत भी बन सकता है।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
स्रोत: Filmitics
